हरियाणा राज्य के भीतर पिछले कुछ समय से आपराधिक गतिविधियों में काफी तेजी देखी जा रही है, जिसके संबंध में पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने वर्तमान सरकार की विफलता को लेकर कड़े शब्दों में आलोचना की है। उन्होंने अपने हालिया बयान में इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की है कि प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में जबरन वसूली यानी फिरौती की मांग, ताबड़तोड़ गोलीबारी की घटनाएं और हत्याओं के फरमान आम बात हो गए हैं। आम नागरिकों, व्यापारियों और उद्योगपतियों में डर का माहौल लगातार गहराता जा रहा है, क्योंकि कानून का डर अपराधियों के मन से कम होता दिखाई दे रहा है। इन गंभीर हालातों के बीच उन्होंने सीधे तौर पर प्रशासनिक मशीनरी और राजनीतिक नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि सरकार पूरी तरह से बेबस नजर आ रही है और प्रदेश की जनता को सुरक्षा प्रदान करने में नाकाम साबित हो रही है। राज्य के इस प्रकार के हालातों से निपटने के लिए किसी ठोस और प्रभावी रणनीति का अभाव साफ तौर पर महसूस किया जा रहा है, जिससे आम जनजीवन और व्यापारिक गतिविधियां दोनों बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।
इस संपूर्ण घटनाक्रम की पृष्ठभूमि को देखा जाए तो हरियाणा में संगठित अपराध और अपराधियों के हौसले बुलंद होने की चर्चा लंबे समय से राजनीतिक गलियारों में होती रही है। विपक्षी दल लगातार सरकार को घेरने का प्रयास करते रहे हैं और पुलिस विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते आए हैं। दुष्यंत चौटाला का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब आम जनता और विभिन्न राजनीतिक संगठन पहले से ही राज्य में बढ़ते अपराध ग्राफ को लेकर मुखर हैं। सुरक्षा एजेंसियों के दावों के बावजूद धरातल पर स्थिति यह है कि अपराधियों में कानून का खौफ नदारद दिखता है, और वे दिनदहाड़े वारदातों को अंजाम देने से गुरेज नहीं कर रहे हैं। इस प्रकार की वारदातों के कारण न केवल प्रदेश की छवि को धक्का लग रहा है, बल्कि निवेशकों और व्यवसायियों के बीच भी असुरक्षा की भावना घर करती जा रही है, जो भविष्य के आर्थिक विकास के लिए एक बड़ा चिंता का विषय बन सकता है।
इस गंभीर स्थिति के परिणाम आने वाले समय में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर दूरगामी हो सकते हैं, जिससे सरकार पर दबाव और अधिक बढ़ जाएगा। विपक्षी नेताओं द्वारा लगातार उठाए जा रहे इन मुद्दों के कारण प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है, हालांकि अभी तक कोई ठोस सुधार जमीन पर दिखाई नहीं दिया है। जनता और व्यापार मंडलों की ओर से भी यह मांग जोर पकड़ने लगी है कि अपराधियों के खिलाफ बिना किसी ढिलाई के सख्त से सख्त कदम उठाए जाएं ताकि प्रदेश में शांति और व्यवस्था बहाल की जा सके। यदि समय रहते इन आपराधिक प्रवृत्तियों पर लगाम नहीं लगाई गई, तो आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु बन सकता है, जिसका सीधा असर आगामी राजनीतिक समीकरणों और जनमानस के विश्वास पर पड़ना तय है।