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राजनीति

पूर्वांचल में रणनीतिक बदलाव: भाजपा अपने चार सहयोगियों को देगी 70 से 75 सीटें

भारतीय जनता पार्टी ने आगामी राजनीतिक समीकरणों को साधने के लिए पूर्वांचल क्षेत्र में अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है, जिसके तहत पार्टी अपने प्रमुख सहयोगियों के प्रति अधिक उदार रवैया अपनाते हुए उन्हें कुल सत्तर से पचहत्तर सीटें सौंपने की तैयारी कर रही है।

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Ankit Yadav
20 सित 2026, 16:07
पूर्वांचल में रणनीतिक बदलाव: भाजपा अपने चार सहयोगियों को देगी 70 से 75 सीटें

उत्तर प्रदेश की राजनीति के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माने जाने वाले पूर्वांचल क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी ने अपनी जीत का चक्रव्यूह तैयार करना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में पार्टी आलाकमान ने अपने चार प्रमुख क्षेत्रीय सहयोगियों के लिए सीटों का एक उदार कोटा निर्धारित किया है, जिसके अंतर्गत इन दलों को सामूहिक रूप से सत्तर से पचहत्तर विधानसभा सीटें दी जाएंगी। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के हर कोने में सामाजिक समीकरणों को पूरी तरह से संतुलित करना और विपक्ष के किसी भी संभावित चुनावी लाभ को पूरी तरह से काटना है, ताकि एनडीए का कुनबा पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर सके।

इस राजनीतिक युक्ति के पीछे का मुख्य संदर्भ राज्य में लगातार मजबूत होती क्षेत्रीय क्षत्रपों की भूमिका और जातियों के जटिल ताने-बाने को साधना है। पूर्वांचल का यह भूभाग हमेशा से उत्तर प्रदेश की सत्ता की चाबी अपने पास रखता आया है, जहाँ हर एक जिले में स्थानीय दलों और विशिष्ट जातियों का प्रभाव बहुत गहरा माना जाता है। पिछले कुछ चुनावों के परिणामों का बारीकी से विश्लेषण करने के बाद भाजपा नेतृत्व ने यह महसूस किया है कि छोटे दलों को साथ लेकर चलने और उनके प्रभाव वाले क्षेत्रों में उन्हें सम्मानजनक हिस्सेदारी देने से चुनावी सफलता की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। इसी पृष्ठभूमि में, पार्टी ने अपने पारंपरिक और नए सहयोगियों के साथ सीट बंटवारे के इस बड़े खाके पर गंभीरता से काम करना शुरू कर दिया है, ताकि समय रहते सभी साझेदार दलों में किसी भी प्रकार की आंतरिक खींचतान को टाला जा सके।

इस दूरगामी कदम से आने वाले दिनों में राज्य के राजनीतिक गलियारों में बड़े समीकरण बदलते हुए दिखाई देंगे और विपक्षी दलों की रणनीतियों पर इसका गहरा असर पड़ेगा। जब क्षेत्रीय दल अपने कोटे की सीटों पर पूरी ताकत से चुनाव लड़ेंगे, तो इसका सीधा फायदा एनडीए के समग्र मत प्रतिशत को मिलेगा और भगवा पार्टी को भी उन सीटों पर बढ़त बनाने में मदद मिलेगी जहाँ पिछले कुछ समय से मुकाबला बेहद कड़ा चल रहा था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा का यह खुला और उदार दृष्टिकोण न केवल गठबंधन के भीतर आपसी भरोसे को और अधिक मजबूत करेगा, बल्कि कार्यकर्ताओं के स्तर पर भी सकारात्मक संदेश पहुंचाएगा। यदि यह फॉर्मूला पूरी तरह से जमीन पर उतरता है, तो यह आगामी चुनावी महासमर में एनडीए के लिए एक बेहद प्रभावी और गेमचेंजर साबित हो सकता है।

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