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यूपीआई टैक्स विरोध: राहुल गांधी ने वीडियो जारी कर प्रधानमंत्री मोदी से शुल्क हटाने की मांग की

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने डिजिटल भुगतान प्रणालियों पर लगाए जाने वाले शुल्कों के खिलाफ मुखर विरोध दर्ज कराते हुए एक वीडियो संदेश जारी किया है और सरकार से इस फैसले को तुरंत वापस लेने की अपील की है।

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Ankit Yadav
17 सित 2026, 16:58
यूपीआई टैक्स विरोध: राहुल गांधी ने वीडियो जारी कर प्रधानमंत्री मोदी से शुल्क हटाने की मांग की
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हाल ही में देश में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस यानी यूपीआई आधारित लेन-देन पर किसी भी तरह के कर या शुल्कों को लागू किए जाने का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने इस संबंध में एक नया वीडियो संदेश सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सार्वजनिक किया है, जिसके माध्यम से उन्होंने केंद्र सरकार और विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा निशाना साधा है। उनका कहना है कि इस प्रकार के डिजिटल भुगतानों पर आर्थिक बोझ डालने से आम नागरिकों और छोटे दुकानदारों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जो डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है।

डिजिटल अर्थव्यवस्था पर असर

डिजिटल लेन-देन की यह सुविधा पिछले कुछ वर्षों में भारत के कोने-कोने तक पहुंच चुकी है और ग्रामीण इलाकों से लेकर महानगरों तक हर छोटा-बड़ा व्यापारी इसका उपयोग कर रहा है। ऐसे में यदि इन लेन-देन पर किसी भी प्रकार के कर का प्रावधान किया जाता है, तो इससे आम जनता का रुझान इस तकनीक से कम हो सकता है। राहुल गांधी ने अपने वीडियो में इस बात पर विशेष जोर दिया कि सरकार को अपनी नीतियों की समीक्षा करते हुए यह सुनिश्चित करना चाहिए कि डिजिटल भुगतान हर नागरिक के लिए पूरी तरह से सुलभ और बिना किसी अतिरिक्त लागत के बना रहे। उनके इस बयान के बाद देश की राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर चर्चाएं तेज हो गई हैं और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता इस पर अपनी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। देशभर में वित्तीय साक्षरता और डिजिटल इंडिया अभियान के तहत कैशलेस व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लोग छोटे भुगतानों के लिए भी अतिरिक्त शुल्क का सामना करेंगे, तो इससे कैशलेस इकॉनमी की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। इसी चिंता को उजागर करते हुए विपक्ष लगातार सरकार से यह मांग कर रहा है कि आम आदमी के हित को ध्यान में रखते हुए इस तरह के किसी भी संभावित वित्तीय बोझ को पूरी तरह से समाप्त किया जाए ताकि व्यापारी वर्ग और आम उपभोक्ता राहत की सांस ले सकें। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद के भीतर और बाहर सियासी सरगर्मी बढ़ने के पूरे आसार हैं। विपक्षी दल इस विषय को जोर-शोर से उठाने की तैयारी में हैं ताकि सरकार पर जनता के पक्ष में फैसला लेने का दबाव बनाया जा सके। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या सरकार इस वीडियो संदेश और बढ़ती मांगों के बाद इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाती है या फिर डिजिटल लेन-देन के शुल्कों को लेकर अपनी मौजूदा नीतियों पर ही कायम रहती है।
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