मणिपुरी म्यूज़िशियन की दिल्ली में पीट-पीटकर हत्या के आरोप में आठ गिरफ़्तार
दिल्ली के सत्य निकेतन में गिरी बिल्डिंग का मालिक हिरासत में लिया गया, पुलिस ने भिवाड़ी से दबोचा
मंत्री हरपाल सिंह चीमा से ड्रग्स की शिकायत, बाद में शख्स ने खाया जहर, विपक्ष ने AAP को घेरा
सचिन तेंदुलकर ने लोनावला में खरीदी आलीशान प्रॉपर्टी, तीन डील में खर्च हुए करीब 70 करोड़
Good News : CM योगी ने आंगनबाड़ी वर्कर्स के लिए खोला खजाना, मानदेय में 50 फीसदी बढ़ोतरी का ऐलान
पीएम मोदी के कार्यक्रम के लिए गजब क्रेज, घंटे भर में सीटें फुल; पहली बार बुकमाईशो पर रजिस्ट्रेशन
‘चौकीदार चोर है’, टिप्पणी केस में राहुल गांधी को बॉम्बे HC से झटका, याचिका खारिज
सैटेलाइट तस्वीरों में देश से 90% बादल गायब: बिहार में बाढ़ से 27 लाख लोग प्रभावित; महाराष्ट्र के अंबोली में...
SENSEX लोड हो रहा...| NIFTY लोड हो रहा...| GOLD (10g) ₹—| SILVER (10g) ₹—| USD/INR ₹—| CRUDE OIL $—|Uttar Pradesh — लोड हो रहा है|--:--:--| लाइव अपडेट
युवा मतदाता: भारतीय राजनीति में कोई एक समान यूथ वोट नहीं है
संजय कुमार के एक हालिया कॉलम में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि भारतीय राजनीतिक परिदृश्य में युवाओं का कोई एक समान या एकीकृत मतदाता वर्ग मौजूद नहीं है।
A
Ankit Yadav
08 सित 2026, 15:58
भारतीय लोकतंत्र में युवाओं की भूमिका को हमेशा से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता रहा है, लेकिन हाल ही में प्रकाशित एक विश्लेषणात्मक लेख में यह रेखांकित किया गया है कि देश के युवाओं को किसी एक समान वैचारिक श्रेणी में नहीं बांधा जा सकता है। राजनीतिक गलियारों में अक्सर 'यूथ वोट' शब्द का इस्तेमाल एक ऐसे समूह के रूप में किया जाता है जो किसी एक मुद्दे या विचारधारा से प्रभावित होकर मतदान करता हो। परंतु वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है, क्योंकि भारत के युवा विभिन्न प्रकार की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और क्षेत्रीय विविधताओं से जुड़े हुए हैं।
युवा मतदाताओं की विविधता और प्राथमिकताएं
राजनीतिक विश्लेषक संजय कुमार के अनुसार, जब हम भारतीय युवाओं का अध्ययन करते हैं, तो हमें यह समझना होगा कि एक महानगर में रहने वाले युवा की प्राथमिकताएं और आकांक्षाएं किसी ग्रामीण इलाके के युवा से बिल्कुल अलग होती हैं। इसके अलावा, जाति, वर्ग, धर्म, भाषा और लिंग जैसे कारक भी युवा मतदाताओं के राजनीतिक व्यवहार को गहराई से प्रभावित करते हैं। यही कारण है कि देश के युवा किसी एक विशेष राजनीतिक दल या नेता के प्रति आँख मूंदकर निष्ठावान नहीं रहते, बल्कि वे अपनी स्थानीय और व्यक्तिगत परिस्थितियों के आधार पर अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं।
चुनाव के दौरान विभिन्न राजनीतिक दल अक्सर युवाओं को लुभाने के लिए रोजगार, शिक्षा और आधुनिकीकरण जैसे वादे करते हैं, लेकिन यह रणनीति हर जगह एक जैसी सफलता हासिल नहीं कर पाती। इसका मुख्य कारण यह है कि अलग-अलग राज्यों के युवाओं की समस्याएं भी एक-दूसरी से काफी भिन्न हैं। उदाहरण के लिए, उत्तर भारत के युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों की मांग सबसे ऊपर हो सकती है, जबकि दक्षिण या पश्चिमी भारत के कुछ हिस्सों में तकनीकी क्षेत्र के अवसर या औद्योगिक विकास अधिक मायने रखते हैं।
राजनीतिक दलों के लिए सबक और भविष्य की दिशा
राजनीतिक दलों को अब यह समझ लेना चाहिए कि युवा वर्ग को लुभाने के लिए पारंपरिक और एक ही सांचे में ढले हुए तरीकों से काम नहीं चलेगा। जब तक दल प्रत्येक क्षेत्र और वर्ग के युवाओं की विशिष्ट आवश्यकताओं को नहीं समझेंगे, तब तक उन्हें चुनावी मैदान में अपेक्षित लाभ मिलना मुश्किल होगा। इस वैचारिक विविधता को स्वीकार करना ही आधुनिक भारतीय लोकतंत्र की असल खूबी है, जहाँ हर युवा नागरिक अपनी स्वतंत्र सूझबूझ के साथ मतदान प्रक्रिया में अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराता है।