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औपनिवेशिक लूट का सच: नई रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटिश शासनकाल में भारत की सत्ताइस प्रतिशत जीडीपी का हुआ नुकसान

एक नए ऐतिहासिक विश्लेषण में औपनिवेशिक काल के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था को हुए भारी नुकसान के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं।

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Kantap News डेस्क
16 अग 2026, 13:10
औपनिवेशिक लूट का सच: नई रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटिश शासनकाल में भारत की सत्ताइस प्रतिशत जीडीपी का हुआ नुकसान
इतिहास के पन्नों को खंगालती एक बेहद सनसनीखेज रिपोर्ट ने ब्रिटिश राज के दौरान भारत से की गई संपत्ति की निकासी के पैमाने को नए सिरे से उजागर किया है। नए शोध के अनुसार औपनिवेशिक शासन के उस काले दौर में कुल वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का लगभग सत्ताइस प्रतिशत हिस्सा भारत से निकाला गया था जिसका अनुमान खरबों डॉलर में लगाया जा रहा है। इस विशालकाय आर्थिक क्षति ने उस समय देश की पारंपरिक अर्थव्यवस्था को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया था और सदियों से चली आ रही समृद्धि को गहरी चोट पहुंचाई थी।

ऐतिहासिक दस्तावेजों का विश्लेषण

इस नए अध्ययन में आधुनिक सांख्यिकीय तरीकों और पुराने ऐतिहासिक दस्तावेजों का गहराई से मिलान करके यह निष्कर्ष निकाला गया है कि किस प्रकार सुनियोजित नीतियों के तहत भारतीय संसाधनों का दोहन किया गया। कपड़ा उद्योग से लेकर कृषि और खनिज संपदा तक हर क्षेत्र को ब्रिटिश साम्राज्य के हितों के अधीन कर दिया गया था जिसके कारण स्थानीय कारीगर और किसान भारी गरीबी के गर्त में धकेल दिए गए। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह केवल धन की चोरी नहीं थी बल्कि एक पूरे समाज की आर्थिक प्रगति को कई दशकों पीछे धकेलने का सुनियोजित षड्यंत्र था।

वैश्विक मंच पर गूंज

इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर औपनिवेशिक काल केमुआवजे और नैतिक जिम्मेदारी को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। इतिहासकार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि नई पीढ़ी को यह पता होना चाहिए कि आधुनिक राष्ट्र निर्माण के मार्ग में किन ऐतिहासिक बाधाओं और अत्याचारों को पार करके यह मुकाम हासिल किया गया है।
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