ग्रीन कार्ड बैकलॉग का गंभीर संकट और रोजगार आधारित आवेदनों की भारी संख्या संयुक्त राज्य अमेरिका के भीतर रोजगार आधारित कानूनी आप्रवासन ढांचे के मोर्चे पर एक बहुत बड़ा गतिरोध पैदा हो गया है जो लगातार अधिक गंभीर रूप लेता जा रहा है। हाल ही में सामने आए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार देश के भीतर विभिन्न श्रेणियों के अंतर्गत लंबित पड़े रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड आवेदनों का बैकलॉग अब बारह लाख के आंकड़े को काफी पीछे छोड़ चुका है। इस विशालकाय बैकलॉग के कारण उन कुशल विदेशी नागरिकों के लिए स्थिति अत्यंत निराशाजनक बन गई है जो वर्षों से अपनी मेहनत के बल पर अमेरिकी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। हर साल तय की जाने वाली सीमित संख्या और देशवार कोटे के नियमों के चलते यह कतार हर गुजरते महीने के साथ और अधिक लंबी होती जा रही है। इस व्यवस्था की जटिलताओं के कारण योग्य पेशेवरों को अपने करियर और भविष्य को लेकर भारी अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि प्रशासनिक और विधायी स्तर पर इस समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस और त्वरित पहल होती नजर नहीं आ रही है।
भारतीय प्रवासियों पर सबसे बड़ा असर और कोटे की पुरानी नीतियां इस विकट आव्रजन संकट का सबसे ज्यादा और सीधा असर उन भारतीय पेशेवरों पर पड़ा है जो तकनीक, विज्ञान, चिकित्सा और प्रबंधन के क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। देशवार सीमा के प्राचीन नियमों के अनुसार किसी भी एक देश के नागरिकों को कुल उपलब्ध ग्रीन कार्ड का एक बहुत ही छोटा प्रतिशत ही मिल सकता है, जिससे अत्यधिक आबादी वाले देशों के आवेदकों के लिए बैकलॉग का आकार असाधारण रूप से बड़ा हो जाता है। वर्तमान परिस्थितियों का विश्लेषण करने वाले विशेषज्ञों और आव्रजन विश्लेषकों का मानना है कि इस मौजूदा कोटे की व्यवस्था और बैकलॉग की मौजूदा रफ्तार को देखते हुए भारतीय नागरिकों को उनके स्थायी निवास के दस्तावेज मिलने में लगभग 179 साल तक का लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। यह समय सीमा किसी भी कामकाजी पेशेवर के पूरे जीवनकाल से कहीं अधिक लंबी है, जिससे यह साबित होता है कि अमेरिका का यह मौजूदा आव्रजन ढांचा आधुनिक वास्तविकताओं और वैश्विक प्रतिभाओं की मांगों के बिल्कुल अनुकूल नहीं रह गया है और इसमें बड़े पैमाने पर सुधार की सख्त आवश्यकता है।
आने वाले समय में संभावित प्रभाव और नीतिगत सुधारों की मांग अमेरिका में इस अभूतपूर्व बैकलॉग और लंबी प्रतीक्षा अवधि के कारण न केवल प्रभावित होने वाले प्रवासियों के परिवारों के सामने गंभीर सामाजिक और व्यक्तिगत संकट खड़े हो रहे हैं, बल्कि अमेरिकी कॉर्पोरेट जगत की चिंताएं भी काफी बढ़ गई हैं। कई बड़ी प्रौद्योगिकी और बहुराष्ट्रीय कंपनियां इस बात से चिंतित हैं कि इस तरह की अत्यधिक लंबी प्रक्रियाओं के कारण वे दुनिया भर से बेहतरीन और कुशल प्रतिभाओं को अपने यहां रोकने में असमर्थ हो जाएंगी, जिससे उनकी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए विभिन्न प्रवासी अधिकार संगठनों, उद्योगपतियों और कुछ अमेरिकी सांसदों द्वारा नीति निर्माताओं पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है कि वे रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड के नियमों में आवश्यक संशोधन करें। यदि आने वाले समय में अमेरिकी संसद या प्रशासन इस दिशा में कोई बड़ा और दूरदर्शी कदम नहीं उठाता है, तो यह संकट और अधिक गहरा सकता है, जिससे हजारों प्रतिभाशाली पेशेवर हताश होकर अमेरिकी बाजार को छोड़कर अन्य देशों का रुख करने के लिए मजबूर हो सकते हैं।