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कानूनी अनुपालन में लापरवाही: अमेरिका के एक पांचवें हिस्से के अटॉर्नी कार्यालयों ने स्वदेशी सुरक्षा कानून का नहीं किया पालन

एक चौंकाने वाली रिपोर्ट में सामने आया है कि अमेरिका के कई अटॉर्नी कार्यालय लापता और मारे गए स्वदेशी लोगों से जुड़े महत्वपूर्ण संघीय कानून का ठीक से पालन नहीं कर रहे हैं।

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Kantap News डेस्क
13 अग 2026, 11:02
कानूनी अनुपालन में लापरवाही: अमेरिका के एक पांचवें हिस्से के अटॉर्नी कार्यालयों ने स्वदेशी सुरक्षा कानून का नहीं किया पालन
मूल अमेरिकी निवासियों के अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े मामलों में एक बड़ी प्रशासनिक लापरवाही का पर्दाफाश हुआ है। हाल ही में जारी की गई एक आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, देश भर के लगभग बीस प्रतिशत ऐसे अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय जो स्वदेशी क्षेत्रों की निगरानी का जिम्मा संभालते हैं, वे ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण लापता एवं मृत स्वदेशी जन सुरक्षा कानून के मानकों का पूरी तरह से उल्लंघन कर रहे हैं। इस कानून का मुख्य उद्देश्य स्वदेशी महिलाओं और पुरुषों के खिलाफ होने वाले गंभीर अपराधों की निष्पक्ष जांच करना और उन्हें त्वरित न्याय दिलाना था, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती के कारण इसके परिणाम धरातल पर नजर नहीं आ रहे हैं।

Gaps in Law Enforcement Oversight

रिपोर्ट में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि जिन कार्यालयों को इन संवेदनशील मामलों की संवेदनशीलता को समझते हुए प्राथमिकता देनी चाहिए थी, वे स्थानीय जनजातीय पुलिस बलों के साथ समन्वय स्थापित करने में पूरी तरह असफल रहे हैं। समन्वय की इस भारी कमी के कारण कई संगीन आपराधिक मामलों की फाइलें धूल फांक रही हैं और अपराधियों तक कानून के हाथ नहीं पहुंच पा रहे हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पीड़ित परिवारों ने इस स्थिति को बेहद शर्मनाक करार देते हुए न्यायपालिका और गृह मंत्रालय से तुरंत जवाब तलब करने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही को रोका जा सके।

Urgent Need for Accountability

इस गंभीर विसंगति को दूर करने के लिए अब न्याय विभाग के उच्च अधिकारियों पर दबाव बढ़ रहा है कि वे दोषी पाए जाने वाले कार्यालयों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करें। विशेषज्ञों का सुझाव है कि प्रत्येक जिले में विशेष जांच इकाइयों का गठन किया जाना चाहिए जो केवल स्वदेशी समुदायों से जुड़े अपराधों पर ही ध्यान केंद्रित करें। जब तक अटॉर्नी कार्यालयों में जवाबदेही तय नहीं की जाती और इस विशेष कानून को पूरी कड़ाई से लागू नहीं किया जाता, तब तक हाशिए पर मौजूद इन समुदायों में सुरक्षा और न्याय का विश्वास बहाल करना असंभव बना रहेगा।
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