संयुक्त राष्ट्र में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बयानों पर भारतीय कूटनीतिक प्रहार संयुक्त राष्ट्र महासभा के हालिया सत्र के दौरान जब पाकिस्तानी हुक्मरान शहबाज शरीफ ने अपनी पुरानी आदत के मुताबिक कश्मीर का राग अलापा, तो भारत की तरफ से इसका बेहद कड़ा और तथ्यपरक जवाब दिया गया। भारतीय कूटनीतिक दल ने मंच का उपयोग करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि पाकिस्तान अपनी अंदरूनी विफलताओं और आर्थिक बदहाली से जनता का ध्यान भटकाने के लिए ऐसे बेबुनियाद और झूठे मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उछालने की पुरानी और असफल रणनीति अपनाता रहा है। भारत ने दुनिया के तमाम देशों के सामने यह बात जोर देकर रखी कि इस तरह के दुष्प्रचार से जमीनी हकीकत बदलने वाली नहीं है और भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने का किसी भी पड़ोसी देश को कोई अधिकार नहीं है। भारतीय प्रतिनिधि ने दो टूक शब्दों में समझाया कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद और शांति की बातें एक साथ नहीं चल सकती हैं, और वैश्विक समुदाय अब पड़ोसी मुल्क के इन दोहरे चरित्र को बहुत अच्छी तरह समझ चुका है जो खुद को पीड़ित बताकर असलियत छुपाने का असफल प्रयास करता रहता है।
आतंकवाद को समर्थन और ओसामा बिन लादेन को पनाह देने का पुराना काला इतिहास भारत ने संयुक्त राष्ट्र के अत्यंत प्रतिष्ठित और जिम्मेदार मंच से पाकिस्तान के उस काले सच को एक बार फिर दुनिया के पटल पर रखा जिसे अक्सर इस्लामाबाद प्रशासन छुपाने की नाकाम कोशिश करता रहा है। भारतीय पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताते हुए याद दिलाया कि यही वह देश है जिसने दुनिया के सबसे बड़े खूंखार आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को अपने यहां सुरक्षित पनाह मुहैया कराई थी और पूरी दुनिया के सामने लंबे समय तक झूठ बोलता रहा था। अंतरराष्ट्रीय राजनीति के विश्लेषक मानते हैं कि आतंकवाद की नर्सरी चलाने वाले देशों के लिए इस प्रकार के मंचों पर खड़े होकर मानवाधिकार या शांति का उपदेश देना केवल ढकोसला मात्र है। जब भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस प्रकार के देशों द्वारा भ्रामक और कपटपूर्ण दावे किए जाते हैं, तो वैश्विक शांति के समर्थन में खड़े राष्ट्रों का यह दायित्व बन जाता है कि वे तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर उनका पर्दाफाश करें। भारत ने हमेशा से ही आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहिष्णुता की नीति का कड़ाई से पालन किया है और दुनिया भर के मंचों पर वैश्विक आतंकवाद के खात्मा करने के लिए सभी देशों को एकजुट होने का मजबूत संदेश दिया है।
कूटनीतिक स्तर पर भारत का आक्रामक रुख और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर इसका प्रभाव अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जानकारों का ऐसा मानना है कि भारत का यह आक्रामक और स्पष्टवादी रुख इस बात का प्रतीक है कि देश अब अपनी विदेश नीति में किसी भी प्रकार के अनर्गल प्रलाप को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। वैश्विक पटल पर भारत के बढ़ते हुए आर्थिक और रणनीतिक कद के कारण अब कोई भी देश बिना किसी ठोस आधार के भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करने में सफल नहीं हो सकता है क्योंकि हर झूठे दावे का अब तुरंत और कड़ा तार्किक उत्तर दिया जाता है। इस घटनाक्रम से पड़ोसी देश को अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बार फिर भारी फजीहत का सामना करना पड़ा है और उसकी विश्वसनीयता पूरी दुनिया में और अधिक निचले स्तर पर पहुंच गई है। भविष्य में भी जब कभी इस तरह की ओछी हरकतें दोहराई जाएंगी, तो भारत के सक्षम और अनुभवी कूटनीतिकार इसी प्रकार से तथ्यों के हथियारों से हर हमले का माकूल जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आएंगे, जिससे वैश्विक समुदाय में भी यह स्पष्ट संदेश जाता है कि भारत अपनी संप्रभुता और सम्मान की रक्षा के लिए हर संभव मंच का प्रभावी ढंग से उपयोग करना अच्छी तरह जानता है।