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पुरातत्व विभाग की बड़ी खोज: आंध्र प्रदेश के नागार्जुनकोंडा के पास मिला गुप्त साम्राज्य काल का दुर्लभ स्वर्ण सिक्कों का भंडार

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के विशेषज्ञों ने आंध्र प्रदेश में उत्खनन के दौरान गुप्त राजवंश के काल के बेहद दुर्लभ और मूल्यवान स्वर्ण सिक्कों का एक बड़ा खजाना खोज निकाला है।

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Kantap News डेस्क
18 अग 2026, 17:38
पुरातत्व विभाग की बड़ी खोज: आंध्र प्रदेश के नागार्जुनकोंडा के पास मिला गुप्त साम्राज्य काल का दुर्लभ स्वर्ण सिक्कों का भंडार
इतिहास और पुरातत्व जगत में एक सनसनीखेज खोज सामने आई है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की एक विशेष अनुसंधान टीम ने कृष्णा नदी घाटी के समीप नागार्जुनकोंडा ऐतिहासिक स्थल के पास खुदाई के दौरान गुप्त साम्राज्य के काल से जुड़े स्वर्ण सिक्कों का एक बड़ा जखीरा बरामद किया है। इन सिक्कों पर सम्राट समुद्रगुप्त और चंद्रगुप्त द्वितीय के काल की विशिष्ट ब्राह्मी लिपि में अंकन और राजसी चित्रकारी स्पष्ट रूप से उकेरी गई है। प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि ये सिक्के उच्च शुद्धता वाले सोने से बने हैं और इनका वजन तत्कालीन शास्त्रीय मानकों के बिल्कुल अनुरूप है, जो उस काल की उन्नत धातु विज्ञान और समृद्ध व्यापारिक संस्कृति का प्रमाण देते हैं।

ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व

पुरातत्वविदों के अनुसार यह खोज इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि दक्षिण भारत के इस क्षेत्र में उत्तर भारत के गुप्त साम्राज्य के सिक्कों की इतनी बड़ी खेप का मिलना इस बात का संकेत है कि कृष्णा घाटी क्षेत्र में सुदूर उत्तर के साथ मजबूत समुद्री और स्थलीय व्यापारिक संबंध थे। सिक्कों के दोनों ओर देवी लक्ष्मी और राजा के पराक्रमी स्वरूप के चित्र उकेरे गए हैं, जो कला इतिहास के दृष्टिकोण से अद्वितीय हैं। राज्य के संग्रहालय विभाग ने इन सभी बहुमूल्य पुरावशेषों को अपनी सुरक्षित अभिरक्षा में ले लिया है और रासायनिक संरक्षण की प्रक्रिया शुरू कर दी है ताकि सदियों पुराने इन सिक्कों की चमक और चमक बरकरार रखी जा सके।

शोध और प्रदर्शन की योजना

इस महत्वपूर्ण खोज के बाद देश और विदेश के प्रतिष्ठित इतिहासकार इस स्थल का दौरा करने लगे हैं। राष्ट्रीय संग्रहालय इन सिक्कों को एक विशेष दीर्घा में आम जनता और शोधकर्ताओं के प्रदर्शन के लिए रखने की तैयारी कर रहा है। इसके साथ ही, उस पूरे क्षेत्र में भूमि के नीचे छिपे अन्य प्राचीन अवशेषों का पता लगाने के लिए अत्याधुनिक ग्राउंड-पेनेट्रेटिंग रडार तकनीक का उपयोग करने का निर्णय लिया गया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने प्राचीन भारतीय इतिहास के कई अनछुए पहलुओं पर से पर्दा उठाने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है।
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