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विदेश

रणनीतिक चेतावनी: प्रधानमंत्री मोदी ने प्रौद्योगिकी और खनिजों के हथियार के रूप में इस्तेमाल पर जताई चिंता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में वैश्विक मंच पर तकनीक और प्राकृतिक संसाधनों के रणनीतिक हथियारों के रूप में दुरुपयोग किए जाने को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है।

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Ankit Yadav
13 सित 2026, 19:49
रणनीतिक चेतावनी: प्रधानमंत्री मोदी ने प्रौद्योगिकी और खनिजों के हथियार के रूप में इस्तेमाल पर जताई चिंता
वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य में हाल के घटनाक्रमों को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आधुनिक तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों के बढ़ते रणनीतिक इस्तेमाल पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किस प्रकार कुछ ताकतवर देश और समूह आपूर्ति श्रृंखलाओं, तकनीकी संसाधनों और मूल्यवान खनिजों को भू-राजनीतिक दबाव बनाने तथा अपनी कूटनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने का माध्यम बना रहे हैं। यह प्रवृत्ति अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक सहयोग की भावना के बिल्कुल विपरीत है, जिससे विकासशील और उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं पर बुरा असर पड़ रहा है।

वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर मंडराता खतरा

प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब दुनिया भर के देश रेयर अर्थ मिनरल्स और अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर तकनीकों तक अपनी पहुंच को लेकर अत्यधिक सतर्क हो गए हैं। कई राष्ट्र इन अहम संसाधनों के वैश्विक व्यापार का इस्तेमाल अन्य देशों को नियंत्रित करने या उन पर अनुचित दबाव डालने के लिए कर रहे हैं। इससे वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल पैदा हो रहा है और निष्पक्ष व्यापार नियमों को गहरी चोट पहुंच रही है। इस प्रकार की प्रवृत्तियों के कारण पूरी दुनिया में सप्लाई चेन के बाधित होने का खतरा हमेशा बना रहता है, जिससे आर्थिक वृद्धि की गति धीमी हो सकती है। भारत जैसे विशाल और तेजी से आगे बढ़ने वाले देशों के लिए यह विषय अत्यधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश का तकनीकी विकास और हरित ऊर्जा संक्रमण बहुत हद तक इन महत्वपूर्ण खनिजों तथा आधुनिक तकनीकों की सुचारू आपूर्ति पर निर्भर करता है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक समुदाय को मिलकर एक ऐसा पारदर्शी और भरोसेमंद ढांचा तैयार करना होगा जो एकाधिकार को रोके और सभी देशों को समान अवसर प्रदान करे। तकनीक और खनिज किसी विशेष देश के भू-राजनीतिक हथियार नहीं बनने चाहिए, बल्कि इनका उद्देश्य मानवता की सामूहिक प्रगति और सतत विकास होना चाहिए। आगामी दिनों में इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर और अधिक गंभीर चर्चा होने की पूरी संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक शक्तियों ने समय रहते इस दिशा में उचित कदम नहीं उठाए, तो भविष्य में संसाधन आधारित संघर्ष और अधिक तीव्र हो सकते हैं। भारत की ओर से दी गई यह चेतावनी वैश्विक अर्थव्यवस्था को संतुलित रखने और निष्पक्ष कूटनीतिक संवाद को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।
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