ईरानी महिलाओं ने शुरू किया सैन्य प्रशिक्षण
ईरान में हाल ही में महिलाओं द्वारा हथियार उठाने और सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त करने की तस्वीरें सामने आई हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस विशेष प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को एके-47 जैसी आधुनिक असॉल्ट राइफलें चलाने का अभ्यास कराया जा रहा है। देश के भीतर और बाहर सुरक्षा चिंताओं के बढ़ने के बाद यह बड़ा कदम उठाया गया है। स्थानीय सूत्रों से मिली खबरों के अनुसार इस अभ्यास में बड़ी संख्या में महिलाएं स्वेच्छा से हिस्सा ले रही हैं। इस प्रकार की सैन्य तैयारियों को लेकर देश के भीतर सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने की बात कही जा रही है। महिलाओं को युद्ध और आत्मरक्षा के लिए तैयार करने का यह कार्यक्रम एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। प्रशिक्षण शिविरों में महिलाओं को विभिन्न प्रकार के हथियारों को संभालने की तकनीकी बारीकियां सिखाई जा रही हैं। इस पूरी प्रक्रिया पर देश के शीर्ष सैन्य अधिकारियों की सीधी नजर बनी हुई है ताकि किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
अमेरिका और इजरायल के साथ तनाव का साया
पश्चिम एशिया क्षेत्र में अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे कड़े गतिरोध के बीच यह घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिका और इजरायल की तरफ से लगातार मिल रही धमकियों और राजनीतिक दबाव के चलते ईरान अपनी रक्षात्मक स्थिति को और अधिक मजबूत करने में जुटा हुआ है। इस तनावपूर्ण माहौल में देश के भीतर आम नागरिकों को भी रक्षात्मक रूप से तैयार करने की कवायद तेज कर दी गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे रणनीतिक मार्गों पर बढ़ते सैन्य जमावड़े के कारण क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं काफी हद तक बढ़ चुकी हैं। अमेरिका के साथ परमाणु वार्ताओं के विफल होने और प्रतिबंधों के कड़े होने के बाद से ही दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष की आशंकाएं जताई जाती रही हैं। इजरायल के साथ चल रहे खुफिया और प्रत्यक्ष तनाव ने क्षेत्रीय समीकरणों को पूरी तरह से बदलकर रख दिया है। इन तमाम भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच महिलाओं का हथियार उठाना देश की आंतरिक रक्षा पंक्ति को और अधिक धार देने का प्रयास प्रतीत होता है। इस मोर्चे पर किसी भी संभावित बाहरी हमले का डटकर मुकाबला करने के लिए देश के कोने-कोने में इस तरह के रक्षात्मक प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन किया जा रहा है।
रणनीतिक महत्व और क्षेत्रीय सुरक्षा के मायने
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग है जहां अमेरिका और ईरान की नौसेनाएं अक्सर आमने-सामने रहती हैं। इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा और नियंत्रण को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से तनातनी का माहौल बना हुआ है। ऐसे में ईरान द्वारा घरेलू मोर्चे पर महिलाओं को सैन्य रूप से प्रशिक्षित करना रणनीतिक रूप से एक बड़ा संदेश देने का प्रयास माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय राजनीति के विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार के कदम से देश की जनता में युद्ध के हालातों का सामना करने का हौसला बढ़ता है। अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे इस कड़े टकराव के दूरगामी परिणाम पूरे वैश्विक बाजार और कूटनीति पर पड़ सकते हैं। कच्चे तेल की आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से होर्मुज क्षेत्र का शांत रहना बेहद आवश्यक है लेकिन वर्तमान परिस्थितियां इसके विपरीत संकेत दे रही हैं। आने वाले दिनों में यदि इन देशों के बीच सैन्य टकराव और अधिक गहराता है तो इस प्रकार के स्थानीय प्रशिक्षण कार्यक्रम और ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाएंगे। वैश्विक समुदाय इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद बारीकी से नजर बनाए हुए है ताकि क्षेत्र में होने वाले हर एक नए बदलाव का सटीक आकलन किया जा सके।