पायलट स्क्रीनिंग पर विशेषज्ञ की चिंता
भारत में विमानन सुरक्षा के मानकों और पायलटों की निगरानी के मुद्दे पर अरविंद सिंघटिया ने गंभीर टिप्पणी की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो एयरलाइंस भारत से बाहर संचालित होती हैं, उनके पायलटों पर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी डीजीसीए का कोई सीधा नियामक नियंत्रण नहीं होता है। वर्तमान नियमों के तहत, ऐसे पायलटों की नियुक्ति, उनकी योग्यता और सुरक्षा संबंधी स्क्रीनिंग की पूरी जिम्मेदारी उसी देश के विमानन प्राधिकरण की होती है, जहां उस एयरलाइन का मुख्य बेस स्थित है। यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन में एक बड़ी चुनौती के रूप में देखी जा रही है। सिंघटिया का मानना है कि विदेशी एयरलाइनों के पायलटों के चयन और उनकी निरंतर निगरानी के लिए भारत को एक मजबूत और स्वतंत्र सुरक्षा ढांचा विकसित करने की तत्काल आवश्यकता है। विमानन सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की कोताही यात्रियों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकती है, जिसे देखते हुए सुरक्षा प्रणालियों को और अधिक पुख्ता करना आवश्यक है।
नियामक जवाबदेही और कॉकपिट प्रोटोकॉल
विमानन सुरक्षा के वर्तमान ढांचे की चर्चा करते हुए सिंघटिया ने बताया कि प्रत्येक देश का विमानन प्राधिकारी अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली एयरलाइनों के संचालन के लिए जिम्मेदार होता है। इसमें पायलटों का चयन, उनका प्रशिक्षण और नियामक अनुपालन सुनिश्चित करना शामिल है। कॉकपिट की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उन्होंने कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय विमानन प्रोटोकॉल के तहत उड़ान के दौरान कॉकपिट के अंदर हर समय न्यूनतम दो लोगों की उपस्थिति अनिवार्य है। यदि कोई पायलट किसी कारणवश कॉकपिट से बाहर जाता है, तो उस स्थिति में पायलट की वापसी तक केबिन क्रू का एक सदस्य वहां मौजूद रहना आवश्यक होता है। यह व्यवस्था सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन प्रक्रियाओं का उद्देश्य उड़ान के दौरान किसी भी अनपेक्षित स्थिति को नियंत्रित करना और कॉकपिट की संवेदनशीलता को पूरी तरह से सुरक्षित बनाए रखना है।
सुरक्षा उपायों की समीक्षा का महत्व
विमानन सुरक्षा के भविष्य पर प्रकाश डालते हुए सिंघटिया ने कहा कि हमें उन स्थितियों पर फिर से गहराई से विचार करने की आवश्यकता है, जहां कॉकपिट के भीतर से ही किसी प्रकार का खतरा उत्पन्न हो सकता है। जब चालक दल के किसी सदस्य से ही सुरक्षा जोखिम पैदा होने की संभावना होती है, तो मौजूदा सुरक्षा उपायों को और अधिक कड़ा करने की जरूरत पड़ती है। भारत जैसे बड़े विमानन बाजार के लिए जरूरी है कि वह विदेशी एयरलाइनों के संचालन के दौरान अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए एक मजबूत तंत्र बनाए। भविष्य में संभावित खतरों को देखते हुए विमानन प्राधिकारियों को अपने वर्तमान सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा करनी चाहिए ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। यह बदलाव न केवल तकनीकी आधार पर होगा बल्कि इसमें पायलटों की मानसिक और सुरक्षात्मक मूल्यांकन प्रक्रियाओं को भी शामिल करने की आवश्यकता हो सकती है। विमानन जगत में सुरक्षा ही प्राथमिकता होनी चाहिए, जिसके लिए नियमों को और अधिक पारदर्शी बनाना समय की प्रमुख मांग है।