ब्रिक्स समिट में बड़े नेता आ गए लेकिन भारत के लिए अब भी कई चीज़ें हैं दांव पर
BRICS करेंसी का समिट में रखा गया प्रस्ताव? भारत ने साफ किया रुख, बताया नई दिल्ली डिक्लेरेशन पर कैसे बनी सहमति
मायावती भतीजी दीपिका को सौंप सकती हैं पार्टी: कहा- आकाश-ईशान को कोई पद नहीं दूंगी; मैं अविवाहित, मजबूरी में...
शी जिनपिंग की भारत यात्रा और ब्रिक्स 2026 को चीन का मीडिया कैसे देख रहा है
दिल्ली में बारिश का रेड अलर्ट, 24 राज्यों में मूसलाधार बारिश की चेतावनी, जानें कल कैसा रहेगा मौसम
सऊदी अरब पर हूती हमलों के बीच पाकिस्तानी मीडिया ने मक्का समझौते पर उठाए सवाल
दुबई के शेख ने खोला खजाना: PM मोदी और क्राउन प्रिंस की मेगा डील डन, भारत में UAE करेगा 1.10 लाख करोड़ का निवेश
नंदीग्राम पर ममता ने साधी चुप्पी, उधर कांग्रेस ने उतार दिया उम्मीदवार; शुभेंदु के गढ़ में महासंग्राम
SENSEX लोड हो रहा...| NIFTY लोड हो रहा...| GOLD (10g) ₹—| SILVER (10g) ₹—| USD/INR ₹—| CRUDE OIL $—|Uttar Pradesh — लोड हो रहा है|--:--:--| लाइव अपडेट
कोयला खनन में क्रांति: बिहार में यूसीजी तकनीक और नई नीलामी प्रक्रिया से बदलेगी सूरत
बिहार में खनिज और ऊर्जा क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है, जिसके तहत कोयले के खनन और उसकी नीलामी की पूरी प्रक्रिया को आधुनिक रूप दिया जा रहा है।
A
Ankit Yadav
12 सित 2026, 12:19
बिहार के औद्योगिक और ऊर्जा परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां राज्य सरकार ने कोयला खनन की तस्वीर को पूरी तरह से बदलने की तैयारी कर ली है। अब पारंपरिक तरीकों से हटकर अत्याधुनिक तकनीकों का सहारा लिया जा रहा है, ताकि खनिज संपदा का दोहन अधिक प्रभावी और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से किया जा सके। इस पूरी प्रक्रिया के तहत राज्य में पहली बार भूमिगत कोयला गैसीकरण यानी अंडरग्राउंड कोल गैसीफिकेशन तकनीक का उपयोग करने की योजना बनाई गई है। इस नई तकनीक के आने से खनन क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे राज्य के आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।
अत्याधुनिक यूसीजी तकनीक का होगा इस्तेमाल
अंडरग्राउंड कोल गैसीकरण तकनीक खनन क्षेत्र में गेम-चेंजर साबित हो सकती है। इस पद्धति के माध्यम से जमीन के भीतर मौजूद कोयले को सतह पर निकाले बिना, सीधे गैस में परिवर्तित किया जाता है। इससे न केवल पारंपरिक खनन में होने वाली भारी लागत और श्रम की बचत होती है, बल्कि पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है। सरकार की इस नई पहल से राज्य के उन क्षेत्रों में विकास की नई राहें खुलेंगी जहां कोयले के बड़े भंडार मौजूद हैं लेकिन तकनीकी बाधाओं के कारण उनका सही उपयोग नहीं हो पा रहा था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक बिहार को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मिल का पत्थर साबित होगी।
बदली हुई नीलामी प्रक्रिया से आएगी पारदर्शिता
तकनीक में बदलाव के साथ-साथ सरकार ने कोयला खदानों की नीलामी के तौर-तरीकों में भी बड़ा बदलाव किया है। अब नीलामी की पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल और निवेशकों के अनुकूल बनाया जा रहा है, ताकि देश और दुनिया की बड़ी खनन कंपनियां राज्य में निवेश करने के लिए आगे आ सकें। नई नीलामी प्रणाली से न केवल सरकारी राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, बल्कि पूरी प्रक्रिया में निष्पक्षता भी सुनिश्चित की जा सकेगी। उद्योग जगत के जानकारों का कहना है कि इस प्रकार के नीतिगत सुधारों से राज्य में औद्योगिक माहौल बेहतर होगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
औद्योगिक विकास और भविष्य की संभावनाएं
इन तमाम बदलावों का दूरगामी प्रभाव बिहार के समग्र विकास पर पड़ेगा। ऊर्जा की बढ़ती माँग को पूरा करने और स्थानीय स्तर पर उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए कोयला संसाधनों का वैज्ञानिक दोहन बेहद जरूरी था। राज्य प्रशासन और संबंधित विभाग इस परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए तेजी से काम कर रहे हैं। आने वाले समय में जैसे-जैसे यूसीजी तकनीक पर आधारित खनन और नई नीलामी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, बिहार देश के प्रमुख खनिज और ऊर्जा केंद्रों में अपनी मजबूत स्थिति दर्ज कराने की दिशा में आगे बढ़ेगा। स्थानीय स्तर पर भी इस बात को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है कि इन आधुनिक कदमों से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।