ब्रिक्स समिट में बड़े नेता आ गए लेकिन भारत के लिए अब भी कई चीज़ें हैं दांव पर
BRICS करेंसी का समिट में रखा गया प्रस्ताव? भारत ने साफ किया रुख, बताया नई दिल्ली डिक्लेरेशन पर कैसे बनी सहमति
मायावती भतीजी दीपिका को सौंप सकती हैं पार्टी: कहा- आकाश-ईशान को कोई पद नहीं दूंगी; मैं अविवाहित, मजबूरी में...
शी जिनपिंग की भारत यात्रा और ब्रिक्स 2026 को चीन का मीडिया कैसे देख रहा है
दिल्ली में बारिश का रेड अलर्ट, 24 राज्यों में मूसलाधार बारिश की चेतावनी, जानें कल कैसा रहेगा मौसम
सऊदी अरब पर हूती हमलों के बीच पाकिस्तानी मीडिया ने मक्का समझौते पर उठाए सवाल
दुबई के शेख ने खोला खजाना: PM मोदी और क्राउन प्रिंस की मेगा डील डन, भारत में UAE करेगा 1.10 लाख करोड़ का निवेश
नंदीग्राम पर ममता ने साधी चुप्पी, उधर कांग्रेस ने उतार दिया उम्मीदवार; शुभेंदु के गढ़ में महासंग्राम
SENSEX लोड हो रहा...| NIFTY लोड हो रहा...| GOLD (10g) ₹—| SILVER (10g) ₹—| USD/INR ₹—| CRUDE OIL $—|Uttar Pradesh — लोड हो रहा है|--:--:--| लाइव अपडेट
मजबूत कूटनीति: केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने ब्रिक्स देशों के बीच अधिक सुदृढ़ और संतुलित व्यापारिक साझेदारियों की आवश्यकता पर दिया जोर
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने ब्रिक्स देशों के साथ व्यापार संबंधों को अधिक गहरा, मजबूत और संतुलित बनाने का आह्वान किया है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में नई स्थिरता आ सके।
A
Ankit Yadav
12 सित 2026, 12:21
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण वक्तव्य देते हुए ब्रिक्स (BRICS) देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की वकालत की है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में सभी सदस्य देशों को मिलकर एक ऐसी व्यवस्था तैयार करनी चाहिए जो अधिक सुदृढ़, टिकाऊ और परस्पर संतुलित हो। उनके इस आह्वान का मुख्य उद्देश्य आपसी सहयोग को बढ़ाकर वैश्विक बाजारों में स्थिरता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है, जिससे विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को भी इसका पूरा लाभ मिल सके।
व्यापारिक संतुलन और भविष्य की दिशा
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में हाल के वर्षों में आए उतार-चढ़ाव को देखते हुए यह बयान बेहद सामयिक माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिक्स जैसे बड़े और प्रभावशाली गुट के भीतर यदि व्यापारिक असंतुलन को दूर किया जाए, तो यह न केवल सदस्य राष्ट्रों के घरेलू बाजारों के लिए फायदेमंद होगा, बल्कि दुनिया भर के निवेशकों में भी एक सकारात्मक संदेश जाएगा। मंत्री ने इस बात को रेखांकित किया कि आधुनिक समय की चुनौतियों का सामना करने के लिए पारंपरिक व्यापारिक तौर-तरीकों में बदलाव लाना जरूरी हो गया है, और इसके लिए सभी साझेदार देशों को आपसी विश्वास के साथ आगे आना होगा।
भारत की ओर से इस प्रकार की पहल इस बात का प्रमाण है कि देश वैश्विक दक्षिण के हितों की पैरवी करने में हमेशा आगे रहता है। ब्रिक्स मंच पर इस तरह के प्रस्ताव आने से आर्थिक सहयोग के नए रास्ते खुलते हैं, जिनमें डिजिटल अर्थव्यवस्था, हरित ऊर्जा और लघु उद्योगों को बढ़ावा देने जैसे विषय भी शामिल हो सकते हैं। आने वाले समय में इन प्राथमिकताओं पर किस प्रकार से अमल किया जाता है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि सदस्य देश आपसी वार्ताओं को कितनी तेजी से व्यावहारिक रूप देते हैं।
इस दिशा में उठाए जाने वाले आगामी कदमों से न केवल द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि होने की उम्मीद है, बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो सकते हैं। उद्योग जगत के जानकारों का मानना है कि यदि ब्रिक्स के भीतर नियमों को अधिक सरल और पारदर्शी बनाया जाए, तो मध्यम वर्गीय उद्योगों और निर्यातकों को इसका सबसे अधिक लाभ मिलेगा। सरकार की यह कोशिश देश की आर्थिक कूटनीति को और अधिक धार देने का काम कर रही है, जिसकी गूंज अंतरराष्ट्रीय मंचों पर साफ तौर पर सुनाई दे रही है।