वाराणसी के अस्सी घाट और गोदौलिया क्षेत्र में भारी बारिश के बाद जलभराव की स्थिति ने स्थानीय निवासियों और पर्यटकों के लिए बड़ी मुसीबतें पैदा कर दी हैं। नगर निगम ने अब इस समस्या को हल करने के लिए एक विशेष कार्य योजना तैयार की है। महापौर ने आज सुबह एक आपातकालीन बैठक बुलाई और अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे सभी नालों की सफाई का काम अगले 48 घंटों के भीतर पूरा करें। शहर के पुराने हिस्सों में जल निकासी व्यवस्था काफी पुरानी है, जिसे आधुनिक बनाने की मांग लंबे समय से की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि अतिक्रमण के कारण भी पानी का बहाव अवरुद्ध हो रहा है, जिसे हटाने के लिए अगले सप्ताह से अभियान शुरू किया जाएगा। स्थानीय लोग लंबे समय से इस समस्या से जूझ रहे हैं और उन्होंने कई बार प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है।
अतिक्रमण हटाओ अभियान की तैयारी नगर निगम के प्रवर्तन दल ने उन दुकानदारों को चेतावनी दी है जिन्होंने नालियों के ऊपर अवैध निर्माण कर रखा है। इस अभियान के तहत मुख्य रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा जहां जलभराव की समस्या सबसे अधिक है। नगर आयुक्त ने कहा है कि यदि निर्धारित समय के भीतर अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो प्रशासन स्वयं कार्रवाई करेगा और उसका खर्च भी संबंधित व्यक्ति से वसूला जाएगा। इसके अतिरिक्त, शहर के मुख्य मार्गों पर ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त करने के लिए नई पाइपलाइनों को बिछाने का प्रस्ताव भी रखा गया है। यह योजना आगामी सप्ताहों में कार्यान्वित की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े। निगम की इस पहल का स्थानीय निवासियों ने स्वागत किया है, लेकिन वे इसके प्रभावी कार्यान्वयन पर भी नजर रखे हुए हैं।
प्रशासन ने शहरवासियों से भी अपील की है कि वे नालियों में कचरा न फेंकें, क्योंकि यह पानी के निकास में सबसे बड़ी बाधा है। कचरा प्रबंधन विभाग ने सभी वार्डों में अतिरिक्त सफाई कर्मचारियों की तैनाती की है ताकि कचरे के ढेरों को नियमित रूप से हटाया जा सके। आगामी दिनों में निगम की टीमें हर क्षेत्र का दौरा करेंगी और स्थिति की समीक्षा करेंगी। यदि कहीं भी काम में लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी। वाराणसी प्रशासन का लक्ष्य आने वाले बरसात के महीनों में शहर को जलभराव मुक्त बनाना है, जिसके लिए जनता का सहयोग भी अनिवार्य है। शहर के सभी वार्ड पार्षदों को भी निर्देश दिया गया है कि वे अपने क्षेत्रों में स्थिति पर व्यक्तिगत रूप से निगरानी रखें।