भारतीय कूटनीति ने एक बार फिर पड़ोसी देश पाकिस्तान के आतंकवाद समर्थक रवैये को पूरी दुनिया के सामने मजबूती से रखा है और वैश्विक ताकतों को उसके पुराने इतिहास की याद दिलाई है। सत्रह सितंबर दो हजार छब्बीस को सामने आए बयानों और रिपोर्टों के अनुसार, भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान इस अत्यंत संवेदनशील और गंभीर तथ्य की ओर आकर्षित किया है कि दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकवादी और अल-कायदा के सरगना ओसामा बिन लादेन को किसी और ने नहीं बल्कि पाकिस्तानी सरजमीं पर ही सुरक्षित ठौर मिला था। नई दिल्ली का यह स्पष्ट संदेश उन तमाम ताकतों के लिए एक कड़ा प्रहार है जो सीमा पार से संचालित होने वाली चरमपंथी गतिविधियों और आतंकवाद के प्रति ढुलमुल रवैया अपनाती हैं। भारत ने दो टूक शब्दों में यह रेखांकित किया है कि जब तक आतंकवाद के उद्गम स्थल और उसे संरक्षण देने वाले चेहरों को बेनकाब नहीं किया जाएगा, तब तक वैश्विक शांति और सुरक्षा का सपना अधूरा ही रहेगा।
इस कड़े रुख के पीछे दशकों का कड़वा इतिहास और अनगिनत सीमा पार आतंकी हमले हैं जिनका सामना भारत को करना पड़ा है। यह सर्वविदित तथ्य है कि ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान के ऐबटाबाद शहर में एक सैन्य ठिकाने के करीब बेहद सुरक्षित माहौल में छिपा कर रखा गया था, जहां अमेरिकी नौसेना के नेवी सील्स ने एक खुफिया अभियान के तहत उसे मार गिराया था। उस घटना के बाद भी पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद के खिलाफ कोई ठोस और ईमानदार कार्रवाई देखने को नहीं मिली, बल्कि उसने अपनी धरती से पनपने वाले विभिन्न आतंकी संगठनों और उनके आकाओं को लगातार संरक्षण देना जारी रखा। भारत लगातार दुनिया को यह बताता रहा है कि पाकिस्तान केवल आतंकवाद का पीड़ित होने का नाटक करता है, जबकि वास्तव में वह वैश्विक जिहादी आतंकवाद का मुख्य केंद्र और शरणस्थली बना हुआ है। क्षेत्रीय स्थिरता को ताक पर रखकर पड़ोसी देश द्वारा चरमपंथियों को पालने-पोसने की नीति ने न केवल दक्षिण एशिया बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
भारत की इस तीखी और स्पष्ट याद दिलाने की रणनीति का दूरगामी कूटनीतिक असर होना तय है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की साख और अधिक गिरेगी। वैश्विक समुदाय अब इस बात को लेकर ज्यादा सतर्क हो रहा है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोहरे मानदंडों को नहीं अपनाया जा सकता है, विशेषकर तब जब पाकिस्तान जैसे देश लगातार वैश्विक वित्तीय और कूटनीतिक सहायता का दुरुपयोग कर अपनी आतंकी संरचनाओं को मजबूत करते रहते हैं। आने वाले समय में भारत के इस रुख से बहुपक्षीय बैठकों और मंचों पर पाकिस्तान पर दबाव और अधिक बढ़ जाएगा, जिससे उसे अपनी भूमि से संचालित होने वाली आतंकी गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए भारी अंतरराष्ट्रीय दबाव का सामना करना पड़ेगा। दुनिया भर के नीति-निर्माताओं और सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच यह आम सहमति बनती जा रही है कि जब तक पाकिस्तान अपनी राज्य-प्रायोजित आतंकवाद की नीति को पूरी तरह से त्याग नहीं देता, तब तक उसके साथ किसी भी प्रकार के सामान्य संबंधों की बहाली या उस पर भरोसा करना असंभव है।