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अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन: ब्रिक्स 2026 आज से नई दिल्ली में हुआ शुरू, भारत और फ्रांस मिलकर स्पेस टेक्नोलॉजी पर कर रहे काम

नई दिल्ली में आज से आधिकारिक तौर पर ब्रिक्स 2026 शिखर सम्मेलन की शुरुआत हो चुकी है, जिसमें अंतरिक्ष तकनीकी और अन्य वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हो रही है।

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Ankit Yadav
12 सित 2026, 11:03
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन: ब्रिक्स 2026 आज से नई दिल्ली में हुआ शुरू, भारत और फ्रांस मिलकर स्पेस टेक्नोलॉजी पर कर रहे काम
राजधानी दिल्ली में आज यानी 12 सितंबर 2026 को ब्रिक्स (BRICS) सम्मेलन का भव्य आगाज हो गया है। इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय आयोजन में दुनिया भर के प्रमुख देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन के दौरान वैश्विक कूटनीति, आर्थिक सहयोग और तकनीकी प्रगति जैसे कई अहम विषयों पर मंथन किया जा रहा है। इस बड़े कूटनीतिक आयोजन को लेकर देश की राजधानी समेत विभिन्न राज्यों में भी काफी उत्साह देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और अन्य प्रमुख शहरों में भी इस सम्मेलन से जुड़े रणनीतिक परिणामों पर विशेषज्ञ अपनी नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि इससे वैश्विक कूटनीति और तकनीकी मोर्चे पर देश की स्थिति मजबूत होगी।

अंतरिक्ष तकनीक में भारत और फ्रांस की साझेदारी

इस बीच सम्मेलन से इतर अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में एक बहुत बड़ा कदम उठाया गया है। भारत और फ्रांस ने आपसी सहयोग को और अधिक प्रगाढ़ करते हुए स्पेस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में मिलकर काम करने का बड़ा फैसला किया है। दोनों देशों के बीच हुई इस साझेदारी से अंतरिक्ष अनुसंधान, उपग्रह प्रक्षेपण और वैज्ञानिक खोजों में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। आधुनिक युग में अंतरिक्ष तकनीक किसी भी देश की सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए रीढ़ की हड्डी मानी जाती है, ऐसे में फ्रांस के साथ यह रणनीतिक गठजोड़ भारत के अंतरिक्ष अभियानों को एक नई वैश्विक ऊंचाई प्रदान करेगा।

अर्थव्यवस्था और सामरिक महत्व

ब्रिक्स मंच हमेशा से ही उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक मजबूत स्तंभ रहा है। इस वर्ष नई दिल्ली में आयोजित हो रहे इस सम्मेलन में आपसी व्यापार को बढ़ावा देने के साथ-साथ डिजिटल अर्थव्यवस्था और तकनीकी हस्तांतरण पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। जानकारों का मानना है कि भारत की अध्यक्षता और कूटनीतिक पहल से इस बार के प्रस्ताव काफी प्रभावी साबित होंगे। लखनऊ जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरी केंद्रों के व्यापारी वर्ग और तकनीक प्रेमियों के लिए भी अंतरिक्ष व वैश्विक व्यापार से जुड़ी ये नई नीतियां भविष्य में नए रास्ते खोल सकती हैं।

आगे की रूपरेखा और उम्मीदें

आने वाले दिनों में इस शिखर सम्मेलन के दौरान कई द्विपक्षीय बैठकों के होने की संभावना है, जिनमें रक्षा, तकनीक और जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर मुद्दों पर मुहर लग सकती है। भारत और फ्रांस के संयुक्त अंतरिक्ष अभियानों की रूपरेखा को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है। देश की जनता और राजनीतिक गलियारों में इस बात की खासी चर्चा है कि यह सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय संबंधों को नई दिशा देगा। जैसे-जैसे बैठक के सत्र आगे बढ़ेंगे, वैसे-वैसे तकनीक और रक्षा क्षेत्र से जुड़े कई और बड़े समझौतों के बाहर आने की उम्मीद है, जिसका सीधा असर भारत की वैश्विक स्थिति पर पड़ेगा।
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