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राजनैतिक हलचल: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए दिल्ली आ रहे जिनपिंग, पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता पर टिकी हैं निगाहें

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत की राजधानी दिल्ली आने वाले हैं, जिसको लेकर कूटनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है।

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Ankit Yadav
12 सित 2026, 10:40
राजनैतिक हलचल: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए दिल्ली आ रहे जिनपिंग, पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता पर टिकी हैं निगाहें
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मद्देनजर वैश्विक मंच पर एक बार फिर से भारत और चीन के संबंधों को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो चुका है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के इस आगामी दिल्ली दौरे ने रणनीतिक विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। देश की राजधानी में आयोजित होने वाले इस बहुपक्षीय आयोजन में दुनिया भर के कई बड़े नेताओं का जमावड़ा लगेगा, जिसमें एशियाई महाद्वीप की दो बड़ी ताकतों के बीच आपसी संवाद की संभावनाओं पर हर किसी की नजर टिकी हुई है।

द्विपक्षीय बातचीत की संभावनाएं

हालिया भू-राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए यह दौरा दोनों देशों के बीच संवाद की बहाली के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि इस उच्चस्तरीय यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक होने की संभावनाओं को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इस तरह की औपचारिक वार्ता को लेकर ड्रैगन का आधिकारिक रुख क्या होगा, इस पर अभी भी कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में दोनों पड़ोसी देशों के बीच सीमा विवाद और व्यापारिक मुद्दों को लेकर विभिन्न स्तरों पर बातचीत चलती रही है, ऐसे में इस शिखर सम्मेलन के इतर होने वाली बैठकों का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। राजधानी दिल्ली सहित पूरे देश में इस महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम को लेकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से लेकर देश के अन्य प्रमुख महानगरों तक के राजनीतिक विश्लेषक इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि यह यात्रा आपसी रिश्तों में जमी बर्फ को पिघलाने में कितनी मददगार साबित होती है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का यह भी कहना है कि बहुपक्षीय मंचों पर नेताओं की मौजूदगी अक्सर अनौपचारिक बातचीत के रास्ते खोलती है, जो अंततः द्विपक्षीय तनाव को कम करने में सहायक हो सकती है। आगामी दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या इस बहुप्रतीक्षित दौरे के दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच कोई सीधी और ठोस बातचीत हो पाती है या नहीं। वैश्विक अर्थव्यस्था और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से भारत और चीन के बीच सुचारू संवाद का होना अत्यंत आवश्यक माना जाता है। ब्रिक्स सम्मेलन के सफल आयोजन के साथ-साथ कूटनीतिक स्तर पर होने वाले इन संपर्कों के परिणाम आने वाले समय में एशियाई कूटनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
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