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कूटनीतिक हलचल: सात साल के लंबे अंतराल के बाद ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने नई दिल्ली पहुंचे शी जिनपिंग, प्रधानमंत्री मोदी से होगी उच्चस्तरीय द्विपक्षीय चर्चा

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में शिरकत करने के लिए नई दिल्ली पहुंच चुके हैं। इस महत्वपूर्ण यात्रा के दौरान उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक होने की पूरी संभावना है, जो दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है।

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Ankit Yadav
12 सित 2026, 13:02
कूटनीतिक हलचल: सात साल के लंबे अंतराल के बाद ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने नई दिल्ली पहुंचे शी जिनपिंग, प्रधानमंत्री मोदी से होगी उच्चस्तरीय द्विपक्षीय चर्चा
वैश्विक कूटनीति के पटल पर एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जिसके तहत चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग साल 2026 के बहुप्रतीक्षित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारतीय राजधानी नई दिल्ली की धरती पर कदम रख चुके हैं। खास बात यह है कि शी जिनपिंग लगभग सात वर्षों के लंबे अंतराल के बाद अधिकारिक तौर पर भारत दौरे पर आए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति के जानकारों की निगाहें इस हाई-प्रोफाइल यात्रा पर टिक गई हैं। इस दौरान देश की राजधानी समेत विभिन्न राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि इस यात्रा से क्षेत्रीय स्थिरता और द्विपक्षीय व्यापारिक मुद्दों पर क्या असर पड़ेगा। हालांकि लखनऊ जैसे प्रमुख शहरों के रणनीतिक और व्यावसायिक हलकों में भी इस कूटनीतिक मुलाकात को लेकर खासी उत्सुकता देखी जा रही है, क्योंकि इसका असर देश की समग्र विदेश और आर्थिक नीति पर पड़ना तय माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी के साथ अहम बैठक

अपनी इस यात्रा के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इस महत्वपूर्ण मुलाकात में दोनों शीर्ष नेता आपसी हितों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर खुलकर विचार-विमर्श करेंगे। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बैठक के दौरान सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बहाली, व्यापारिक असंतुलन को दूर करने के उपाय और वैश्विक मंचों पर आपसी सहयोग जैसे संवेदनशील विषयों पर विस्तार से चर्चा हो सकती है। दोनों देशों के बीच पिछले कुछ वर्षों में उपजे तनाव को कम करने की दिशा में इस वार्ता को एक ठोस कदम के रूप में देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी और जिनपिंग के बीच होने वाली इस आमने-सामने की बातचीत से एशिया और दुनिया भर के कई अन्य देशों का ध्यान भी आकर्षित हुआ है, क्योंकि वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिहाज से भारत और चीन की यह मुलाकात अत्यंत निर्णायक साबित हो सकती है। ब्रिक्स संगठन के भीतर आपसी एकजुटता को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित हो रहा यह शिखर सम्मेलन मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में विशेष महत्व रखता है। आर्थिक सहयोग, तकनीकी आदान-प्रदान और बहुपक्षीय मंचों पर विकासशील देशों की आवाज को बुलंद करने के संदर्भ में इस समिट के एजेंडे में कई बड़े प्रस्ताव शामिल किए गए हैं। नई दिल्ली में हो रहे इस आयोजन के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था के भी अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं ताकि सभी वैश्विक मेहमानों की यात्रा पूरी तरह सुरक्षित और सुगम बनी रहे। स्थानीय प्रशासन और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने मेहमान राष्ट्रप्रमुखों के स्वागत और उनकी आवाजाही के लिए पुख्ता प्रबंध किए हैं, जिससे किसी भी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके। इस शिखर सम्मेलन के समापन के बाद कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद जताई जा रही है, जो भविष्य की दिशा तय करेंगे। कूटनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि जिनपिंग की इस भारत यात्रा से कूटनीतिक बर्फ पिघलने में मदद मिल सकती है और भविष्य में उच्च स्तरीय संवाद के रास्ते सुगम हो सकते हैं। जैसे-जैसे बैठक के सत्र आगे बढ़ेंगे, वैसे-वैसे दोनों देशों की तरफ से आधिकारिक बयानों के जरिए इस मुलाकात के नतीजों और समझौतों की पूरी तस्वीर साफ होती जाएगी, जिस पर देश-दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।
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