बाब एल मंडेब के पास युद्ध
यमन के हूती और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से जारी संघर्ष अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। मौजूदा खबरों के अनुसार युद्ध की यह भीषण आग अब बाब एल मंडेब के पास तक फैल चुकी है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति के लिए दुनिया के सबसे अहम रास्तों में से एक माना जाता है। इस सामरिक क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों के बढ़ने से पूरे इलाके में तनाव चरम पर पहुंच गया है। स्थानीय नागरिकों और क्षेत्रीय प्रशासन के बीच सुरक्षा को लेकर चिंताएं काफी ज्यादा बढ़ गई हैं। हूती विद्रोहियों की ओर से इस क्षेत्र में लगातार आक्रामक रुख अपनाया जा रहा है। सऊदी अरब की सेनाएं भी इस स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से सतर्क और मुस्तैद बनी हुई हैं। दोनों पक्षों के बीच चल रहे इस टकराव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान भी अपनी ओर आकर्षित किया है। किसी भी बड़ी दुर्घटना से बचने के लिए सामरिक तौर पर इस समुद्री मार्ग की निगरानी और सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
अरामको पर हमले की घटना
इस ताजा संघर्ष के दौरान सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी अरामको पर भी हमला किए जाने की बात सामने आई है। अरामको दुनिया की सबसे बड़ी ऊर्जा कंपनियों में से एक है और इसके परिसरों पर हमला होना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका माना जाता है। हालांकि इस हमले से हुए नुकसान और सुरक्षा प्रबंधों के बारे में अभी पूरी और विस्तृत जानकारी सामने नहीं आ पाई है। सऊदी अरब के अधिकारियों द्वारा इस घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था की नए सिरे से समीक्षा की जा रही है। हूती विद्रोहियों ने हाल के वर्षों में कई बार ऊर्जा संयंत्रों और तेल भंडारों को अपना निशाना बनाया है। इस बार का यह ताजा हमला उसी पुरानी रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है जिससे क्षेत्रीय स्थिरता को एक बार फिर बड़ा खतरा पैदा हो गया है। ऊर्जा बाजार से जुड़े जानकारों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं से कच्चे तेल की कीमतों पर असर पड़ सकता है। कूटनीतिक स्तर पर इस हमले की विभिन्न देशों द्वारा निंदा की जा रही है और सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
संघर्ष का व्यापक प्रभाव
यमन और सऊदी अरब के बीच चल रहा यह पुराना संघर्ष मध्य पूर्व की भू-राजनीति में एक बहुत बड़ा और संवेदनशील मुद्दा रहा है। इस लड़ाई में मोहम्मद बिन सलमान यानी एमबीएस की भूमिका और नीतियां बहुत अहम मानी जाती हैं जो सऊदी अरब के फैसलों का केंद्र हैं। बाब एल मंडेब जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और यहाँ से हर दिन करोड़ों बैरल तेल का परिवहन होता है। यदि इस मार्ग पर अशांति बढ़ती है तो वैश्विक स्तर पर माल भाड़ा और ईंधन के दाम आसमान छू सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय संगठन इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं ताकि व्यापारिक जहाजों की आवाजाही सुरक्षित बनी रहे। कूटनीतिज्ञों का यह मानना है कि जब तक दोनों पक्ष बातचीत की टेबल पर नहीं आते तब तक इस क्षेत्र में शांति स्थापित होना बहुत मुश्किल है। आम जनता के लिए इस तरह के युद्ध विनाशकारी साबित होते हैं क्योंकि इससे मानवीय संकट और आर्थिक बदहाली दोनों गहरी होती हैं। आने वाले दिनों में इस मोर्चे पर क्या नया घटनाक्रम सामने आता है इस पर दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों की नजर टिकी हुई है।