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देश-दुनिया ब्रेकिंग

कूटनीतिक हलचल: प्रधानमंत्री मोदी के रूस दौरे के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर पहुंचे यूक्रेन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ रूस में हुई महत्वपूर्ण बातचीत के बाद, अब विदेश मंत्री एस जयशंकर यूक्रेन के दौरे पर पहुंच गए हैं। इस उच्चस्तरीय कूटनीतिक यात्रा को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

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Ankit Yadav
04 सित 2026, 13:10
कूटनीतिक हलचल: प्रधानमंत्री मोदी के रूस दौरे के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर पहुंचे यूक्रेन
भारतीय कूटनीति के मोर्चे पर इन दिनों एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील घटनाक्रम देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में रूस की यात्रा के दौरान राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ लंबी चर्चा की थी और कई वैश्विक मुद्दों पर भारत का दृष्टिकोण स्पष्ट किया था। मॉस्को के साथ इस उच्चस्तरीय संवाद के तुरंत बाद, विदेश मंत्री एस जयशंकर का यूक्रेन की राजधानी पहुंचना वैश्विक पटल पर विशेष महत्व रखता है। इस यात्रा को लेकर दुनिया भर के राजनीतिक विश्लेषक यह कयास लगा रहे हैं कि क्या भारत रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे लंबे गतिरोध को समाप्त करने की दिशा में कोई नई मध्यस्थता की पहल कर रहा है।

वैश्विक शांति के प्रयासों पर टिकी निगाहें

भारत की विदेश नीति हमेशा से ही शांति और संवाद के पक्ष में रही है। नई दिल्ली ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि किसी भी युद्ध या संघर्ष का समाधान रणक्षेत्र में नहीं बल्कि बातचीत की मेज पर ही निकल सकता है। जब प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी नेतृत्व के सामने शांति का संदेश रखा, तो उसके ठीक बाद विदेश मंत्री का यूक्रेन का दौरा इस बात का संकेत देता है कि भारत दोनों पक्षों के संपर्क में रहकर कूटनीतिक संतुलन बनाए रखना चाहता है। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पूरी दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या भारत वैश्विक शांति बहाली में एक बड़ी और निर्णायक भूमिका निभाने के लिए आगे आ रहा है। विदेशी मामलों के जानकारों का मानना है कि एस जयशंकर की यह यूक्रेन यात्रा केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि इसके पीछे द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और चल रहे संघर्ष पर यूक्रेन के नेतृत्व का पक्ष जानने का एक गंभीर प्रयास है। भारत दोनों देशों के साथ अपने पारंपरिक और मजबूत रिश्तों को बनाए रखते हुए तटस्थ लेकिन सक्रिय मध्यस्थ की भूमिका की संभावनाओं को टटोल रहा है। कीव पहुंचने पर भारतीय विदेश मंत्री का स्वागत और वहां होने वाली उच्चस्तरीय बैठकें आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय में इस बात की चर्चा भी जोरों पर है कि क्या आने वाले हफ्तों में वैश्विक राजनीति में कुछ बड़ा और अप्रत्याशित बदलाव देखने को मिल सकता है। पश्चिमी देश और यूरोपीय राष्ट्र भी भारत की इन कूटनीतिक गतिविधियों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी के रूस दौरे के बाद एस जयशंकर का यह कदम यह साबित करता है कि भारत अब वैश्विक मंच पर अपनी कूटनीतिक ताकत और स्वतंत्र विदेश नीति का पूरी मजबूती के साथ प्रदर्शन कर रहा है। आने वाले समय में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि भारत के इन शांति प्रयासों का क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति पर क्या असर पड़ता है।
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