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कूटनीतिक शर्मिंदगी: SCO सम्मेलन की तस्वीर से पीएम मोदी और ईरानी राष्ट्रपति को हटाया गया

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के एक हालिया सम्मेलन से जुड़ी तस्वीरों में पाकिस्तान की ओछी मानसिकता एक बार फिर जगजाहिर हो गई है, जहां से भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति को ही गायब कर दिया गया।

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Ankit Yadav
02 सित 2026, 14:08
कूटनीतिक शर्मिंदगी: SCO सम्मेलन की तस्वीर से पीएम मोदी और ईरानी राष्ट्रपति को हटाया गया
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक मर्यादाओं को ताक पर रखते हुए पड़ोसी देश पाकिस्तान ने एक बार फिर अपनी छोटी हरकतों का परिचय दिया है। शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ सम्मेलन के दौरान ली गई आधिकारिक तस्वीरों में हेरफेर करके भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति को फ्रेम से हटा दिया गया। इस तरह के कृत्यों से एक बार फिर स्पष्ट हो गया है कि कूटनीतिक मंचों पर भी वैमनस्यता और ओछी राजनीति को प्राथमिकता दी जाती है, जिसकी वैश्विक स्तर पर व्यापक स्तर पर आलोचना हो रही है। अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में इस प्रकार की हरकतें वैश्विक कूटनीति के बुनियादी नियमों के खिलाफ मानी जाती हैं और इससे क्षेत्रीय तनाव कम होने के बजाय और अधिक बढ़ने की आशंका बनी रहती है।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर राजनीतिक दुर्भावना

विशेषज्ञों का मानना है कि एससीओ जैसे महत्वपूर्ण बहुपक्षीय संगठनों का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय सहयोग, आपसी विश्वास और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना होता है। हालांकि, जब इस प्रकार के मंचों का इस्तेमाल तुच्छ राजनीतिक प्राथमिकताओं और प्रोपेगैंडा के लिए किया जाता है, तो इससे संगठनों की साख पर भी सवालिया निशान खड़े होते हैं। पाकिस्तान द्वारा की गई इस नापाक हरकत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वह द्विपक्षीय और बहुपक्षीय दोनों ही मोर्चों पर सकारात्मक संवाद स्थापित करने में विफल रहा है। इस तरह के रवैये से न केवल पड़ोसी देशों के साथ संबंध और अधिक खराब होते हैं, बल्कि वैश्विक मंच पर उसकी छवि भी एक गैर-जिम्मेदार राष्ट्र के रूप में धूमिल होती है। लखनऊ और देश के अन्य हिस्सों में भी राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में इस घटना को लेकर काफी नाराजगी देखने को मिल रही है, और विश्लेषकों का कहना है कि भारत ऐसे ओछे कदमों से बिल्कुल भी प्रभावित नहीं होता है। भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए अंतरराष्ट्रीय संगठनों को और अधिक कड़े नियम बनाने की आवश्यकता है ताकि कोई भी देश अपनी राजनीतिक कुंठाओं को उजागर करने के लिए बहुपक्षीय मंचों का दुरुपयोग न कर सके। वैश्विक समुदाय भी इस बात से भली-भांति वाकिफ है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अंतरराष्ट्रीय पटल पर कितनी मजबूती से अपनी बात रखता है और ऐसे दुष्प्रचारों का उस पर कोई असर नहीं पड़ता है। आने वाले दिनों में कूटनीतिक स्तर पर इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं, क्योंकि यह केवल दो नेताओं को हटाने का मामला नहीं है बल्कि अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल और शालीनता का गंभीर उल्लंघन है।
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