दक्षिण-पूर्व एशिया में वनों की आग का प्रभाव
इंडोनेशिया के वनों में धधक रही आग का विकराल रूप अब पड़ोसी देशों के आसमान पर भी गहरा असर डाल रहा है। इस प्राकृतिक आपदा के कारण उत्पन्न हुआ भारी धुआं पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में व्यापक रूप से तैर रहा है। परिणामस्वरूप, सिंगापुर और मलेशिया सहित कई समीपवर्ती स्थानों पर वायुमंडल की शुद्धता का स्तर गंभीर रूप से गिर गया है। स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि लोगों को सांस लेने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस संकट के पीछे मुख्य कारण इंडोनेशियाई जंगलों की आग और प्रतिकूल मौसमी दशाएं बताई जा रही हैं। वायु गुणवत्ता मापने वाली संस्था आईक्यूएयर के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, सिंगापुर की हवा की गुणवत्ता अब खतरनाक रूप से अस्वास्थ्यकर श्रेणी में जा पहुंची है। इस भारी प्रदूषण के कारण सिंगापुर ने खराब हवा की सूचकांक सूची में दिल्ली को भी पीछे छोड़ दिया है। इस वैश्विक सूची में कुआलालंपुर, हनोई, ढाका और जकार्ता जैसे प्रमुख शहर भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं। स्थानीय लोग लगातार आंखों में चुभन और सांस फूलने जैसी शारीरिक समस्याओं से जूझ रहे हैं।
प्रदूषित हवा के बीच सिंगापुर सरकार की राहत पहल
क्षेत्रीय स्तर पर हवा की गुणवत्ता इतनी अधिक गिर चुकी है कि नागरिकों का सामान्य जीवन भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। सिंगापुर के प्रशासन ने इस गंभीर स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य संबंधी मुश्किलों से निपटने के लिए वित्तीय सहायता और सब्सिडी की घोषणा की है। अधिकारियों का मानना है कि इस प्रकार की आर्थिक मदद से प्रभावित नागरिकों को समय पर चिकित्सीय परामर्श और दवाइयां प्राप्त करने में सुविधा होगी। इस बीच, शहरी इलाकों के भीतर टूटी हुई सड़कों और विभिन्न स्थानों पर चल रहे निर्माण कार्यों से उड़ने वाले धूल कणों ने हवा को और अधिक जहरीला बना दिया है। इन धूल के गुबारों ने वातावरण को ऐसा बना दिया है कि वहां सामान्य रूप से सांस लेना भी दूभर हो गया है। उधर भारतीय उपमहाद्वीप के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में भी वायु गुणवत्ता की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। दिल्ली में प्रदूषण का उच्च स्तर पहले की तरह ही लगातार बना हुआ है। विभिन्न मौसमी कारकों के कारण प्रदूषण के आंकड़ों में रोजाना उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, जिससे आम जनता की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। विशेषज्ञ इस स्थिति पर लगातार अपनी नजर बनाए हुए हैं और हालात सुधरने की उम्मीद कर रहे हैं।
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में हवा की स्थिति
भारतीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नोएडा और ग्रेटर नोएडा में भी हवा की गुणवत्ता लगातार खराब श्रेणी में बनी हुई है। बुधवार के दिन नोएडा का वायु गुणवत्ता सूचकांक 203 और ग्रेटर नोएडा का सूचकांक 225 रिकॉर्ड किया गया। इन आंकड़ों के आधार पर ग्रेटर नोएडा देश भर के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में तीसरे स्थान पर दर्ज किया गया है। स्थानीय मौसम विज्ञान विभाग और क्षेत्र के पर्यावरण विशेषज्ञों के विश्लेषण के मुताबिक, हवाएं करीब 20 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से बह रही हैं। इतनी गति से चलने वाली हवाओं के कारण हानिकारक प्रदूषक कण एक ही स्थान पर टिक नहीं पा रहे हैं। इस प्राकृतिक गतिशीलता के कारण ही वायु गुणवत्ता सूचकांक खतरनाक रेड जोन यानी गंभीर श्रेणी में जाने से बाल-बाल बच गया है। हालांकि, इसे किसी बड़ी राहत के रूप में नहीं देखा जा सकता क्योंकि स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है। यह लगातार तीसरा दिन है जब हवा का स्तर ऑरेंज जोन यानी खराब श्रेणी में ही स्थिर बना हुआ है। स्थानीय निवासियों के लिए यह हवा लगातार आंखों की जलन और सांस लेने में भारी तकलीफ का कारण बन रही है। प्रशासन और विशेषज्ञ इस स्थिति से निपटने के लिए लगातार आकलन कर रहे हैं और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।