संयुक्त राष्ट्र में भारतीय प्रतिनिधि का कड़ा प्रहार संयुक्त राष्ट्र के सत्र के दौरान वैश्विक पटल पर भारत की ओर से बोलते हुए पेटल गहलोत ने पड़ोसी राष्ट्र द्वारा फैलाए जा रहे तमाम मनगढ़ंत और आधारहीन बयानों का सिलसिलेवार तरीके से खंडन किया। उन्होंने बहुत ही सधे हुए अंदाज में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने यह स्पष्ट किया कि किस प्रकार दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता को बाधित करने के लिए भ्रामक जानकारियों का सहारा लिया जा रहा है। अपने आधिकारिक संबोधन में उन्होंने उन तमाम दावों की धज्जियां उड़ा दीं जो पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व द्वारा दुनिया को गुमराह करने के लिए गड़े गए थे। इस तीखी प्रतिक्रिया ने विश्व निकाय के गलियारों में सबका ध्यान आकर्षित किया और यह साबित कर दिया कि भारत अब हर एक भ्रामक बयान का मंच पर ही ठोस एवं तार्किक आंकड़ों के साथ जवाब देने में पूरी तरह सक्षम है। पेटल गहलोत के इस मुखर और निर्भीक रुख ने वैश्विक कूटनीति के क्षेत्र में भारत के बढ़ते हुए प्रभाव और आत्मविश्वास को एक बार फिर से पूरी दुनिया के सामने मजबूती के साथ रेखांकित करने का काम किया है।
पाकिस्तान के झूठे प्रचार की खुल गई पोल अंतरराष्ट्रीय मंचों का इस्तेमाल अक्सर पड़ोसी देश द्वारा अपने आंतरिक राजनीतिक संकटों से जनता का ध्यान भटकाने और भारत के खिलाफ झूठा एजेंडा चलाने के लिए किया जाता रहा है। इसी रणनीति के तहत जब भी दुनिया के बड़े मंच जुटते हैं, वहां तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने की पुरानी आदत देखने को मिलती है। हालांकि, भारत की तरफ से ऐसे हर एक कुचक्र का जवाब देने के लिए अब बेहद स्पष्ट, परिपक्व और अकाट्य कूटनीतिक रणनीतियों का उपयोग किया जाता है। वैश्विक कूटनीति के जानकारों का मानना है कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में जब युवा और तेजतर्रार भारतीय प्रतिनिधि देश का पक्ष रखते हैं, तो इससे न केवल कूटनीतिक स्तर पर बढ़त मिलती है बल्कि आतंकवाद और मानवाधिकार जैसे संवेदनशील मुद्दों पर पड़ोसी देश का दोहरा चरित्र भी बेनकाब हो जाता है। इस बार भी संयुक्त राष्ट्र की इस महत्वपूर्ण बैठक में जो कुछ हुआ, वह उसी लंबी और सोची-समझी कूटनीतिक रणनीति का एक जीवंत हिस्सा था जिसके तहत भारत हर एक मंच पर अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों के खिलाफ उठने वाली हर आवाज का मुंहतोड़ और कानूनी रूप से पुख्ता जवाब देने से कभी पीछे नहीं हटता है।
वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती कूटनीतिक ताकत संयुक्त राष्ट्र जैसे अत्यंत प्रभावशाली और विशाल वैश्विक मंच पर इस प्रकार की स्पष्टवादिता से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भारत का कद और अधिक मजबूत होता है। आज के समय में दुनिया के तमाम देश इस बात को भली-भांति समझने लगे हैं कि आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का रुख कितना अडिग और स्पष्ट है, और वह अपने पड़ोसी की किसी भी उकसावे वाली कार्रवाई या दुष्प्रचार को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। इस घटनाक्रम के बाद वैश्विक स्तर पर विभिन्न कूटनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में अपनी बात रखने के लिए केवल पारंपरिक बयानों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह तथ्यों और सबूतों के आधार पर विरोधी पक्षों के हर एक झूठ की परतें खोलने का माद्दा रखता है। आने वाले समय में इसका दूरगामी असर कूटनीतिक वार्ताओं और बहुपक्षीय बैठकों पर पड़ना तय है, जहां भारत की इस मुखर शैली के कारण पाकिस्तान जैसे देशों को हर बार दुनिया के सामने शर्मिंदा होना पड़ेगा और उन्हें अपने निराधार बयानों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई भी सहानुभूति या समर्थन हासिल नहीं हो सकेगा।