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वैश्विक मंच: ब्रिक्स सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तकनीक और खनिजों को हथियार न बनाने का आह्वान किया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान दुनिया को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि क्रिटिकल मिनरल्स और तकनीक को किसी भी स्थिति में भू-राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
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Ankit Yadav
15 सित 2026, 12:29
हाल ही में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के सामने एक बेहद अहम मुद्दा उठाया। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक विकास और आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित रखने के लिए यह आवश्यक है कि आवश्यक खनिजों और आधुनिक तकनीकों को किसी प्रकार के दबाव का जरिया न बनाया जाए। आधुनिक युग में डिजिटल और तकनीकी प्रगति की गति बेहद तेज हो चुकी है, और ऐसे में इन संसाधनों का इस्तेमाल संप्रभु राष्ट्रों के खिलाफ राजनीतिक या आर्थिक उत्पीड़न के लिए करना पूरी वैश्विक व्यवस्था के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।
वैश्विक सहयोग और आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा
प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब दुनिया भर के देश रणनीतिक संसाधनों की कमी और उनकी आपूर्ति को लेकर चिंतित हैं। ब्रिक्स जैसे बड़े मंचों पर इस तरह की चर्चा होने से विकासशील और उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं को एक मजबूत मंच मिलता है। प्रधानमंत्री मोदी ने रेखांकित किया कि आपसी विश्वास और पारदर्शी सहयोग के माध्यम से ही वैश्विक अर्थव्यवस्था को स्थिर रखा जा सकता है। जब तकनीक और क्रिटिकल मिनरल्स को निष्पक्ष रूप से सभी देशों के लिए उपलब्ध कराया जाता है, तभी समावेशी विकास का सपना साकार हो सकता है। इसके अलावा, उन्होंने इस बात की वकालत की कि किसी एक देश या समूह का इन संसाधनों पर अनुचित नियंत्रण नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे पूरी दुनिया में असंतोष और संकट की स्थिति पैदा हो सकती है।
भविष्य की नीतियां और कूटनीतिक प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की यह टिप्पणी आने वाले दिनों में वैश्विक कूटनीति और व्यापार समझौतों पर गहरा प्रभाव छोड़ेगी। आजकल अधिकांश राष्ट्र अपनी तकनीकी और औद्योगिक ज़रूरतों के लिए महत्वपूर्ण खनिजों पर निर्भर हैं, और यदि इन पर किसी प्रकार के प्रतिबंध या अवांछित दबाव बनाए जाते हैं, तो वैश्विक व्यापार प्रभावित होता है। भारत ने हमेशा से ही स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार प्रणाली का समर्थन किया है। ब्रिक्स सम्मेलन में दी गई इस चेतावनी से यह स्पष्ट होता है कि भारत वैश्विक मंचों पर निष्पक्षता और न्यायसंगत नीतियों का एक मजबूत पक्षधर बना हुआ है।
आगामी समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इस संदेश को किस प्रकार अपनाता है और क्या वैश्विक संगठन क्रिटिकल मिनरल्स के सुचारू वितरण के लिए कोई नई रूपरेखा तैयार करते हैं। भारत की इस पहल ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वह वैश्विक दक्षिण की आवाज़ को प्रमुखता से उठाने और दुनिया को एक नई दिशा दिखाने में सक्षम है। ब्रिक्स के अन्य सदस्य देशों ने भी आपसी सहयोग को और अधिक मजबूत करने तथा तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने पर अपनी सहमति जताई है, जिससे आने वाले महीनों में नए आर्थिक और कूटनीतिक समीकरण देखने को मिल सकते हैं।