जहानाबाद का सत्तू दुनिया भर में मशहूर
बिहार के जहानाबाद जिले में तैयार होने वाला पारंपरिक सत्तू अब वैश्विक स्तर पर अपनी एक खास पहचान बना चुका है। स्थानीय स्तर पर भुने हुए चने और अन्य अनाजों से तैयार किया जाने वाला यह पौष्टिक आहार अब अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पार कर चुका है। जहानाबाद की इस पारंपरिक खाद्य सामग्री की ख्याति दुनिया भर के देशों में तेजी से फैल रही है। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग इस देसी आहार को अपने दैनिक भोजन में शामिल कर रहे हैं। इस उत्पाद की लोकप्रियता बढ़ने से स्थानीय कारीगरों और निर्माताओं में भी काफी उत्साह देखा जा रहा है। दुनिया भर के बाजारों में इस प्राचीन भारतीय व्यंजन की मांग में लगातार इजाफा दर्ज किया जा रहा है। लोग इसे सेहतमंद जीवनशैली का एक बेहतरीन और प्राकृतिक विकल्प मान रहे हैं। विदेशी बाजारों में भी इस पारंपरिक व्यंजन को लेकर काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आ रही है। इस प्रकार जहानाबाद का यह साधारण दिखने वाला खाद्य उत्पाद अब एक वैश्विक पहचान हासिल कर चुका है।
दो हजार पांच सौ साल पुराना देसी सुपरफूड
यह पारंपरिक व्यंजन करीब दो हजार पांच सौ साल पुराना एक प्राचीन देसी सुपरफूड है। इतिहास और परंपरा के अनुसार इस पौष्टिक आहार का सेवन सदियों से लोग करते आ रहे हैं। प्राचीन काल से ही इसे शारीरिक ऊर्जा और ताकत का एक बड़ा स्रोत माना गया है। आधुनिक विज्ञान भी अब इस पारंपरिक खाद्य पदार्थ के अनगिनत स्वास्थ्य लाभों की पुष्टि कर रहा है। इसमें मौजूद पोषक तत्व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं। पेट की सेहत और पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में यह उत्पाद बेहद कारगर साबित होता है। अत्यधिक गर्मी के दिनों में शरीर को ठंडा रखने और ऊर्जावान बनाए रखने के लिए लोग इसका सेवन करते हैं। इसमें पाए जाने वाले प्राकृतिक खनिज और प्रोटीन इसे एक संपूर्ण आहार बनाते हैं। रासायनिक पदार्थों से दूर यह पूरी तरह से एक प्राकृतिक और शुद्ध खाद्य विकल्प है। यही वजह है कि आज की आधुनिक और भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग इसकी तरफ तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। प्राचीन काल की यह विरासत आज के समय में आधुनिक पोषण विज्ञान की कसौटी पर भी पूरी तरह खरी उतर रही है।
पारंपरिक खानपान और वैश्विक बाजार का महत्व
पारंपरिक भारतीय खानपान और देसी अनाजों की महत्ता आज पूरी दुनिया में नए सिरे से समझी जा रही है। फास्ट फूड संस्कृति के इस दौर में लोग फिर से अपने प्राचीन और स्वस्थ खानपान की तरफ लौट रहे हैं। जहानाबाद के सत्तू जैसी चीजें इस बात का प्रमाण हैं कि हमारे पूर्वजों का भोजन कितना वैज्ञानिक और स्वास्थ्यवर्धक था। वैश्विक स्तर पर इस प्रकार के सुपरफूड्स की मांग बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है। स्थानीय स्तर पर उत्पादित होने वाली वस्तुएं जब अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचती हैं तो रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं। पोषण विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे पारंपरिक उत्पादों को बढ़ावा देना सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है। आने वाले समय में इस प्राचीन देसी सुपरफूड की पहुंच दुनिया के और भी कई देशों तक होने की पूरी संभावना है। सरकार और स्थानीय प्रशासन भी पारंपरिक उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया से न केवल सांस्कृतिक विरासत को सहेजने में मदद मिलती है बल्कि आर्थिक विकास को भी बल मिलता है।