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पीएचडी प्रवेश विवाद: राजस्थान यूनिवर्सिटी में चहेतों को लाभ देने के लिए आरक्षित सीटों में बड़ा फेरबदल

राजस्थान यूनिवर्सिटी के पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जहां कथित तौर पर कुछ चुनिंदा और करीबी उम्मीदवारों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए आरक्षित श्रेणी की सीटों में बड़े पैमाने पर बदलाव किए जाने का गंभीर मामला उजागर हुआ है।

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Ankit Yadav
01 सित 2026, 17:54
पीएचडी प्रवेश विवाद: राजस्थान यूनिवर्सिटी में चहेतों को लाभ देने के लिए आरक्षित सीटों में बड़ा फेरबदल
राज्य के उच्च शिक्षा जगत में एक बार फिर से पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजधानी जयपुर स्थित प्रतिष्ठित राजस्थान यूनिवर्सिटी के अंतर्गत संचालित होने वाले पीएचडी पाठ्यक्रमों में प्रवेश की चयन प्रक्रिया में बड़ा घालमेल किया गया है। शुरुआती रिपोर्टों से यह बात सामने आ रही है कि कुछ खास लोगों को फायदा पहुंचाने के नापाक इरादे से नियमों को ताक पर रखकर आरक्षित कोटे की सीटों की संख्या और उनके आवंटन में भारी फेरबदल किया गया है। इस प्रकार की अनियमितताओं से मेहनतकश और योग्य विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होने की आशंका जताई जा रही है, जो लंबे समय से इस प्रतिष्ठित संस्थान से शोध करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे थे।

पारदर्शिता पर उठे गंभीर सवाल

विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा अपनाई जाने वाली प्रवेश नीतियों की विश्वसनीयता पर अब चारों तरफ से उंगलियां उठने लगी हैं। शिक्षाविदों और छात्र संगठनों का मानना है कि यदि इस प्रकार के मामलों में उच्च स्तरीय जांच नहीं कराई जाती है, तो उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश पाने के इच्छुक आम और गरीब छात्रों का व्यवस्था से पूरी तरह से विश्वास उठ जाएगा। आरक्षित सीटों के आवंटन में हेरफेर करने के पीछे कौन लोग शामिल हैं और इसके लिए किसकी संलिप्तता रही है, यह जांच का विषय बनता जा रहा है। आमतौर पर विश्वविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी और यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप रखने का दावा किया जाता है, परंतु इस ताजा घटनाक्रम ने प्रशासनिक दावों की पोल खोलकर रख दी है। छात्रों और विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े युवा संगठनों ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ा रोष व्यक्त किया है। उनका साफ तौर पर कहना है कि यूनिवर्सिटी के भीतर चल रहे इन कथित खेलों को किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा। संगठन के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों के खिलाफ जल्द से जल्द सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो वे बड़े स्तर पर उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे। इस तरह के मामलों से न केवल संस्थान की प्रतिष्ठा धूमिल होती है, बल्कि पूरे प्रदेश के शैक्षणिक माहौल पर भी इसका बेहद नकारात्मक असर पड़ता है। भविष्य की कार्रवाई के संदर्भ में यह अनुमान लगाया जा रहा है कि बढ़ते दबाव के चलते विश्वविद्यालय प्रशासन या उच्च शिक्षा विभाग इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कोई उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित कर सकता है। कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद ही यह पूरी तरह से स्पष्ट हो पाएगा कि इस फेरबदल के पीछे कौन से प्रशासनिक अधिकारी या शिक्षक जिम्मेदार थे। तब तक यह मामला जयपुर से लेकर पूरे राजस्थान के शैक्षणिक गलियारों में एक सुलगता हुआ मुद्दा बना रहेगा और सभी की निगाहें इस बात पर टिकी होंगी कि प्रशासन इस अनियमितता पर किस प्रकार का कड़ा कदम उठाता है।
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