छत्तीसगढ़ की इस महान सांस्कृतिक और पारंपरिक सफलता के तहत प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में कुल डेढ़ करोड़ दीयों को एक साथ जलाया गया, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। इस अभूतपूर्व आयोजन के केंद्र बिंदु रहे 'आशीर्वाद का दीया' को आधिकारिक तौर पर गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में शामिल कर लिया गया है, जो राज्य के लिए एक गौरवशाली क्षण है। इस भव्य आयोजन में न केवल प्रशासनिक अमले और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने बढ़-चढ़कर अपनी भागीदारी सुनिश्चित की, बल्कि आम नागरिकों ने भी बड़े पैमाने पर दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इतनी बड़ी संख्या में दीपों का एक साथ जलाया जाना इस बात का प्रमाण है कि राज्य की सांस्कृतिक और पारंपरिक जड़ें कितनी गहरी हैं और यहाँ के लोग अपने पर्वों और उत्सवों को किस भव्यता के साथ मनाते हैं। इस रिकॉर्ड की घोषणा के बाद से ही पूरे प्रादेशिक क्षेत्र में उत्सव का माहौल बन गया है और हर तरफ इस ऐतिहासिक उपलब्धि की चर्चा हो रही है.
इस तरह के विशाल सांस्कृतिक आयोजनों के पीछे मुख्य उद्देश्य राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजना और उसे वैश्विक पटल पर एक नई पहचान दिलाना होता है। छत्तीसगढ़ सरकार और स्थानीय सांस्कृतिक निकायों द्वारा मिलकर इस तरह के आयोजनों की रूपरेखा तैयार की जाती है ताकि न केवल पारंपरिक उत्सवों को बढ़ावा मिले, बल्कि सामाजिक समरसता और जनभागीदारी का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी प्रस्तुत किया जा सके। इस आयोजन के लिए महीनों पहले से तैयारियां शुरू कर दी गई थीं, जिसमें दीयों के निर्माण से लेकर उनके वितरण और सही समय पर प्रज्ज्वलन तक की पूरी श्रृंखला को बेहद अनुशासित तरीके से अंजाम दिया गया। इस प्रकार के भव्य अनुष्ठान स्थानीय स्तर पर कारीगरों, कुम्हारों और छोटे व्यापारियों को भी आर्थिक संबल प्रदान करते हैं क्योंकि डेढ़ करोड़ दीयों की मांग ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी एक नई गति दी है। इस ऐतिहासिक आयोजन ने यह साबित कर दिया है कि जब किसी बड़े उद्देश्य के लिए सामूहिक प्रयास किए जाते हैं, तो किस प्रकार वैश्विक स्तर पर अपनी छाप छोड़ी जा सकती है और रिकॉर्ड बुक में नया इतिहास रचा जा सकता है.
इस विश्व रिकॉर्ड के स्थापित होने के बाद अब यह माना जा रहा है कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ राज्य सांस्कृतिक पर्यटन के एक बड़े केंद्र के रूप में उभरेगा, जिससे देश-विदेश के पर्यटकों का ध्यान इस क्षेत्र की ओर आकर्षित होगा। इस प्रकार की उपलब्धियों से न केवल स्थानीय नागरिकों में अपनी संस्कृति के प्रति गौरव की भावना प्रबल होती है, बल्कि युवा पीढ़ी भी अपनी प्राचीन परंपराओं से जुड़ने के लिए प्रेरित होती है। राज्य प्रशासन और आयोजकों का मानना है कि यह सफलता केवल एक रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य में ऐसे कई और बड़े सांस्कृतिक और सामाजिक आयोजनों को सफलतापूर्वक संपन्न कराने का मार्ग प्रशस्त करेगी। इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने लाखों लोग इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि छत्तीसगढ़ आने वाले दिनों में अपनी सांस्कृतिक विशिष्टता के बल पर वैश्विक मानचित्र पर एक नई पहचान बनाने में पूरी तरह कामयाब होगा। इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी सिद्ध कर दिया है कि सामूहिक इच्छाशक्ति और मजबूत सांस्कृतिक चेतना के माध्यम से कैसे बड़े से बड़े लक्ष्यों को आसानी से हासिल किया जा सकता है