छुट्टी के दिन स्कूल में जबरन प्रवेश और दाह संस्कार
दूदू के मालपुरा रोड पर स्थित स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल में रविवार चार अक्टूबर को साप्ताहिक अवकाश था। दोपहर के समय लगभग दो बजे बागरिया जाति के करीब दो सौ लोग एक ट्रैक्टर-ट्रॉली में लकड़ियां और बाबू बागरिया का शव लेकर वहां पहुंचे। बाबू बागरिया माल की ढाणी दूदू का रहने वाला था। विद्यालय के मुख्य द्वार पर तैनात सुरक्षा गार्ड जगदीश गुर्जर ने जब उन लोगों को अंदर जाने से रोकने की कोशिश की तो उन्होंने गार्ड को धमकाया। इसके बाद भीड़ ने मुख्य द्वार का ताला तोड़ डाला और जबरदस्ती स्कूल परिसर के अंदर प्रवेश कर गए। उस समय स्कूल पूरी तरह बंद था और पढ़ाई का कोई कार्य नहीं हो रहा था। उन लोगों ने बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के सीधे स्कूल के मैदान के अंदर ही शव का दाह संस्कार कर दिया। जब तक पुलिस बल और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे तब तक अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया लगभग समाप्त हो चुकी थी। इस घटना की जानकारी मिलने के बाद स्कूल प्रशासन और स्थानीय लोगों ने विद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं और इसे पूरी तरह अनुचित बताया है।
प्रधानाचार्य की सख्त शिकायत और प्रशासन द्वारा जांच के आदेश
घटना की जानकारी मिलने के बाद विद्यालय की प्रधानाचार्य सरिता मीणा ने एडीएम दूदू को लिखित शिकायत सौंपी और सख्त कार्रवाई की मांग की। प्रधानाचार्य ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि वर्ष 2016 के बाद से उनके कार्यकाल में इस तरह की यह पहली घटना है। बिना अनुमति के शैक्षणिक परिसर में घुसना, मुख्य द्वार का ताला तोड़ना, सुरक्षा गार्ड को डराना-धमकाना और बच्चों की पढ़ाई वाली जगह का उपयोग दाह संस्कार के लिए करना बहुत गंभीर मामला है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए दूदू के एसडीएम गुलाब सिंह वर्मा ने त्वरित कदम उठाया। उन्होंने स्कूल परिसर में हुए इस अवैध दाह संस्कार के मामले की जांच के लिए तहसीलदार को औपचारिक आदेश जारी कर दिए हैं। इसके साथ ही ताला तोड़कर जबरन अंदर घुसने वाले सभी उपद्रवी लोगों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश स्थानीय पुलिस थाने को दिए गए हैं। दूदू के थानाधिकारी संजयप्रसाद मीणा और सीओ अनुपम मिश्रा ने बताया कि पुलिस ने इस संबंध में औपचारिक मामला दर्ज कर लिया है और वीडियो फुटेज तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू कर दी है ताकि दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके।
जमीन के स्वामित्व का विवाद और पूर्ववर्ती इतिहास की सच्चाई
स्कूल परिसर में शव जलाए जाने की इस घटना के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर एक नया विवाद भी खड़ा हो गया है। कुछ स्थानीय लोगों का यह तर्क है कि जिस जमीन पर वर्तमान में यह सरकारी स्कूल बना हुआ है, वह बहुत पहले उनके समाज के लोगों के लिए श्मशान के रूप में उपयोग की जाती थी। उनका दावा है कि इस जगह पर पहले भी अंतिम संस्कार किए जाते रहे हैं। हालांकि स्कूल प्रशासन ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि वर्ष 2008 के बाद से यह पूरी जमीन आधिकारिक रूप से स्कूल के नाम पर हस्तांतरित हो चुकी है। इस भूखंड पर अब एक पक्का स्कूल भवन और मजबूत चारदीवारी का निर्माण भी कराया जा चुका है। पिछले अठारह वर्षों में इस शिक्षण संस्थान के परिसर के भीतर कभी भी इस तरह का कोई दाह संस्कार नहीं हुआ है। स्कूल अधिकारियों का साफ कहना है कि शैक्षणिक परिसर में इस तरह की गतिविधियां होना पूरी तरह गैरकानूनी है। स्थानीय पार्षद पुरुषोत्तम स्वामी ने भी इस घटना को बेहद गंभीर और निंदनीय बताया है। उनका कहना है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा, विद्यालय की गरिमा और वहां के शांतिपूर्ण माहौल को बनाए रखने के लिए इस तरह की हरकत करने वालों के खिलाफ प्रभावी और सख्त कार्रवाई करना बहुत जरूरी है।