अरावली की सबसे ऊंची चोटी और प्रशासनिक परिचय
प्रसिद्ध हिल स्टेशन माउंट आबू के अंतर्गत नगरपालिका के साथ ही ओरिया नामक एक विशिष्ट ग्राम पंचायत भी कार्य करती है। यह संपूर्ण राजस्थान राज्य की सबसे ऊंचाई पर स्थित ग्राम पंचायत मानी जाती है। इसी पंचायत क्षेत्र की सीमाओं के भीतर समुद्र तल से 1722 मीटर की ऊंचाई पर अरावली पर्वत शृंखला की सबसे शीर्ष चोटी गुरुशिखर खड़ी है। प्रशासनिक तौर पर इस पंचायत के अधिकार क्षेत्र में कुल नौ बस्तियां आती हैं। इन सभी बस्तियों के नाम अचलगढ़, ओरिया, उतरज, गुरुशिखर, शेरगांव, जवाई, आरना, आकी तथा ब्लॉक नंबर 3 बताए गए हैं। पर्वतीय श्रृंखलाओं के मध्य बसे इस भूभाग में अचलगढ़ का प्राचीन दुर्ग भी शामिल है। पंचायत के अंतर्गत आने वाले ग्राम विकास अधिकारी अशोक सिंह द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2011 की जनगणना में यहाँ की कुल आबादी 1159 दर्ज की गई थी। मौजूदा समय में इस पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत होने वाले चुनावों के लिए कुल मतदाताओं की संख्या 2200 है। वहीं दूसरी ओर अगर वर्तमान स्थिति की बात की जाए तो इस पूरे क्षेत्र की कुल जनसंख्या लगभग तीन हजार के आसपास पहुँच चुकी है। पर्वतीय और प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण यह क्षेत्र देश और दुनिया के सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करता है।
वीरान बस्तियां और दुर्गम गांवों का कठिन जीवन
भौगोलिक दृष्टि से इस पर्वतीय पंचायत में दो ऐसे गांव भी मौजूद हैं जो पिछले कई दशकों से पूरी तरह वीरान पड़े हैं। इन खाली पड़े स्थानों में आकी गांव और ब्लॉक नंबर 3 शामिल हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार सन 1930 के दशक के आसपास इन दोनों बस्तियों में कोई भयंकर बीमारी या महामारी फैल गई थी। इसके अलावा जीवन जीने के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव होने के कारण लोग इन जगहों को छोड़कर अन्यत्र चले गए थे। इस पंचायत के कुल दायरे में लगभग दो सौ से ढाई सौ मकान बने हुए हैं जहाँ विभिन्न समाजों के लोग निवास करते हैं। यहाँ रहने वाले अनेक परिवार अपनी आजीविका चलाने के लिए खेती बाड़ी, पशुपालन तथा पर्यटन से जुड़े व्यवसायों पर पूरी तरह निर्भर हैं। दूसरी तरफ इस पंचायत के शेरगांव और उतरज जैसे दो बेहद दुर्गम गांव आज भी ऐसे हैं जहाँ पहुँचने के लिए पक्का सड़क मार्ग उपलब्ध नहीं है। इन दोनों गांवों के निवासियों को अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए प्रतिदिन सात से बारह किलोमीटर तक का लंबा सफर पहाड़ी पगडंडियों से पैदल तय करके गुरुशिखर तक आना पड़ता है। समुद्र तल से लगभग पंद्रह किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित शेरगांव के निवासियों को केवल पाँच किलोमीटर पैदल चलकर अपना वोट डालने के लिए उतरज गांव पहुँचना पड़ता है। सर्दियों के मौसम में इस पूरे इलाके में अत्यधिक ठंड पड़ती है और खराब मौसम के चलते कुछ परिवार नीचे के इलाकों में चले जाते हैं।
धार्मिक स्थल पर्यटन और विकास की मुख्य चुनौतियाँ
इस पहाड़ी पंचायत की ख्याति केवल प्राकृतिक सौंदर्य तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसकी पहचान यहाँ के प्रसिद्ध धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों से भी जुड़ी हुई है। पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए यहाँ अचलगढ़ का ऐतिहासिक किला, अचलेश्वर महादेव मंदिर, जैन मंदिर, चामुंडा माता मंदिर तथा माँ काली माता मंदिर जैसे स्थान विशेष महत्व रखते हैं। इसके अलावा ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा संचालित पीस पार्क भी इस इलाके का एक बड़ा आकर्षण है जहाँ देश और विदेश से लोग शांति तथा आध्यात्मिक शांति की खोज में आते हैं। महाभारत काल के पांडव पुत्र भीम से जुड़ी भीम गुफा भी इसी क्षेत्र में स्थित है जिसे देखने के लिए लोग आते हैं। इस ग्राम पंचायत की मुख्य कमाई का जरिया टोल नाके और पर्यटन स्थलों पर होने वाली वाणिज्यिक गतिविधियां ही हैं। पर्यटन से अच्छी खासी आय प्राप्त होने के बावजूद इस क्षेत्र के कई गांवों में सड़क संपर्क, उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं आज भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। स्थानीय निवासियों को छोटी-छोटी सुविधाओं के लिए भी काफी संघर्ष करना पड़ता है क्योंकि दुर्गम रास्ते होने के कारण सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर इन तक नहीं पहुँच पाता है। सर्दियों के दिनों में यहाँ का मौसम काफी कठिन हो जाता है जिससे लोगों की परेशानियां और अधिक बढ़ जाती हैं।