झारखंड भवन की लिफ्ट में अचानक फंसा पूर्व सांसद का परिवार
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में स्थित झारखंड भवन के अंदर एक अप्रिय और खतरनाक घटना सामने आई है। इस बड़ी दुर्घटना के शिकार पूर्व सांसद घूरन राम अपने परिवार के सदस्यों के साथ लिफ्ट का उपयोग कर रहे थे। अचानक लिफ्ट में तकनीकी खराबी आने के कारण वह बीच के रास्तों में ही पूरी तरह से अटक गई। इस अचानक हुए हादसे से लिफ्ट के अंदर मौजूद सभी लोगों में भारी अफरातफरी और भय का माहौल पैदा हो गया। पूर्व सांसद और उनके परिवार के लोग काफी देर तक उस बंद और अंधेरे डिब्बे के अंदर फंसे रहे। लिफ्ट के दरवाजे बंद हो जाने के कारण हवा का आवागमन पूरी तरह से रुक गया और तापमान तेजी से बढ़ने लगा। इस गंभीर स्थिति के कारण अंदर मौजूद लोगों को सांस लेने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ा। मदद के लिए तुरंत किसी प्रकार की प्रभावी कार्रवाई न होने के कारण अंदर की स्थिति लगातार बद से बदतर होती चली गई। इस बड़ी घटना की सूचना मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों और तकनीकी कर्मियों के बीच भी हड़कंप मच गया। लिफ्ट को बाहर से खोलने के लिए तुरंत प्रयास शुरू किए गए ताकि अंदर फंसे हुए सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। इस प्रकार की घटनाएं इमारतों के रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था पर कई प्रकार के गंभीर और बड़े सवाल खड़े करती हैं।
दम घुटने और घुटन से अचेत हुए छह लोग
लिफ्ट के भीतर लगातार ऑक्सीजन की कमी होने के कारण स्थिति बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई। घुटन और भारी उमस के कारण पूर्व सांसद घूरन राम के परिवार के कुल छह सदस्य बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े। लंबे समय तक बंद स्थान पर रहने और शुद्ध हवा न मिलने की वजह से इन सभी लोगों की शारीरिक स्थिति काफी बिगड़ गई थी। जब काफी मशक्कत के बाद लिफ्ट के दरवाजे खोले गए तो अंदर का दृश्य बेहद डरावना और चिंताजनक था। बेहोश पड़े सभी छह लोगों को तुरंत प्राथमिक उपचार देने की सख्त आवश्यकता महसूस की गई। मौके पर मौजूद लोगों और सुरक्षाकर्मियों की मदद से सभी अचेत लोगों को तुरंत लिफ्ट से बाहर निकाला गया। इसके बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से नजदीकी अस्पताल ले जाने के लिए एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई। डॉक्टरों की टीम ने तुरंत सभी बेहोश हुए लोगों का इलाज शुरू किया ताकि उनकी हालत में सुधार लाया जा सके। इस अचानक हुई स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति ने वहां मौजूद सभी लोगों को गहरे सदमे में डाल दिया था। अस्पताल में डॉक्टरों की देखरेख में सभी प्रभावित लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है ताकि किसी भी तरह के खतरे को टाला जा सके। परिवार के अन्य सदस्यों ने इस पूरी घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए प्रबंधन की लापरवाही पर सवाल उठाए हैं।
सार्वजनिक भवनों में सुरक्षा और रखरखाव पर उठे गंभीर सवाल
इस प्रकार की घटनाएं सार्वजनिक और सरकारी भवनों में सुरक्षा मानकों की पोल खोलकर रख देती हैं। झारखंड भवन जैसे महत्वपूर्ण परिसरों में इस तरह की तकनीकी खामियां होना यात्रियों की जान के साथ सीधा खिलवाड़ माना जाता है। इस घटना के बाद से आम नागरिकों और पूर्व जनप्रतिनिधियों के बीच भारी रोष और चिंता का माहौल व्याप्त हो गया है। लिफ्ट जैसी बुनियादी सुविधाओं का नियमित रखरखाव न होना इस प्रकार के बड़े हादसों का सबसे बड़ा मुख्य कारण बनता है। भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कड़े प्रशासनिक कदम उठाने की सख्त जरूरत है। सभी सरकारी और गैर-सरकारी बहुमंजिला इमारतों में लिफ्ट की समय पर जांच और सर्विसिंग अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए। यदि समय रहते सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं तो इस तरह के जानलेवा हादसों को आसानी से टाला जा सकता है। इस घटना से सबक लेते हुए संबंधित विभागों को तुरंत एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन करना चाहिए। दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों और मेंटेनेंस एजेंसियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो। आम जनता ने भी मांग की है कि सभी महत्वपूर्ण भवनों की लिफ्टों की तकनीकी स्थिति की तुरंत नए सिरे से व्यापक जांच कराई जाए।