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बिजनौर में प्रदर्शन: एनएचएम कर्मचारियों ने मांगों की पूर्ति के लिए खोला मोर्चा

बिजनौर में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत कार्यरत कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू किया है। अपनी विभिन्न वित्तीय और सेवा शर्तों को पूरा करने के दबाव में इन कर्मचारियों ने धरना दिया।

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Ankit Yadav
09 अक्ट 2026, 18:11
बिजनौर में प्रदर्शन: एनएचएम कर्मचारियों ने मांगों की पूर्ति के लिए खोला मोर्चा

एनएचएम कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन शुरू

बिजनौर जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों ने आज विरोध का रास्ता अपना लिया है। यह प्रदर्शन उन कर्मचारियों द्वारा किया जा रहा है जो लंबे समय से अपनी मांगों को सरकार के समक्ष रखने का प्रयास कर रहे थे। स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले इन कर्मचारियों ने धरना स्थल पर इकट्ठा होकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। इस दौरान बड़ी संख्या में स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कर्मी मौजूद रहे और उन्होंने एक स्वर में अपनी बात रखी। प्रदर्शन के कारण कार्यालयों में कामकाज पर असर पड़ना स्वाभाविक है, लेकिन कर्मचारियों का दावा है कि उनकी उपेक्षा के कारण ही उन्हें यह कदम उठाना पड़ा है। जिला स्तर पर हुए इस आयोजन में विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों के प्रति प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया है। सुबह से ही शुरू हुए इस धरने में कर्मचारियों ने बैनर और नारों के माध्यम से अपनी आपत्तियों को मजबूती के साथ सार्वजनिक मंच पर रखा है।

प्रदर्शन की मुख्य वजह और कर्मचारियों की मांगें

प्रदर्शन कर रहे एनएचएम कर्मचारियों का कहना है कि उनकी अनेक मांगें अब तक पूरी नहीं की गई हैं। इसमें मुख्य रूप से वेतन वृद्धि, नौकरी की सुरक्षा और नियमितीकरण जैसे वित्तीय मामले शामिल हैं जो उनके भविष्य को सीधे प्रभावित करते हैं। कर्मचारियों का तर्क है कि वे विपरीत परिस्थितियों में भी स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू रूप से चलाने का काम करते हैं, लेकिन इसके बदले में उन्हें अपेक्षित सम्मान और आर्थिक लाभ नहीं मिल पा रहा है। धरने के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो, इसके लिए वहां उपस्थित नेतृत्व ने अनुशासन बनाए रखने की अपील की। कर्मचारियों ने मांग की है कि प्रशासन उनके प्रतिनिधियों के साथ बैठकर इन मुद्दों पर वार्ता करे ताकि किसी समाधान तक पहुंचा जा सके। अब तक की स्थिति के अनुसार, किसी भी वरिष्ठ अधिकारी की ओर से प्रदर्शनकारियों को तुरंत कोई ठोस आश्वासन मिलने की जानकारी नहीं है। स्वास्थ्य कर्मियों की यह नाराजगी उनकी कार्यदशा में सुधार लाने की एक सामूहिक कोशिश मानी जा रही है जो पिछले कई महीनों से लंबित चली आ रही है।

एनएचएम का महत्व और प्रशासनिक संदर्भ

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है जिसका लक्ष्य ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इस प्रणाली में काम करने वाले कर्मचारी अक्सर अनुबंध के आधार पर तैनात होते हैं, जिससे उनकी नौकरी की शर्तें और वित्तीय लाभ स्थाई सरकारी कर्मियों से भिन्न हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में अक्सर वेतन विसंगति और सेवा संबंधी असुरक्षा के मुद्दे सामने आते रहते हैं, जो कर्मचारियों को सामूहिक विरोध के लिए मजबूर करते हैं। इस तरह के धरने केवल एक जिले तक सीमित नहीं होते, बल्कि ये पूरे राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था के संचालन पर असर डालते हैं। आने वाले समय में इन कर्मचारियों और प्रशासन के बीच होने वाली बातचीत ही इस गतिरोध को समाप्त करने का एकमात्र रास्ता है। आम जनमानस के लिए इन सेवाओं की निर्बाध उपलब्धता अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए स्वास्थ्य कर्मियों की मांगों का समाधान करना प्रशासन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि मांगों पर विचार नहीं किया गया तो यह आंदोलन और अधिक व्यापक रूप ले सकता है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना बनी रहेगी।

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