लेखपालों ने सरकारी संचार समूहों को छोड़ा
बिजनौर जिले के लेखपालों ने सामूहिक रूप से अपने आधिकारिक व्हाट्सएप समूहों को छोड़ने का निर्णय लिया है। यह निर्णय उनकी लंबी समय से चली आ रही मांगों के प्रति प्रशासन के उदासीन रवैये के विरोध में लिया गया है। लेखपालों का कहना है कि उनकी समस्याओं का निराकरण न होने से वे काफी समय से परेशान हैं। इन व्हाट्सएप समूहों का उपयोग आमतौर पर जिला प्रशासन और तहसील स्तर के अधिकारियों द्वारा दैनिक कार्यों के निर्देश देने और रिपोर्ट साझा करने के लिए किया जाता था। लेखपालों के इस समूह से बाहर निकलने के बाद अब सरकारी काम-काज की डिजिटल संचार व्यवस्था पर सीधा असर पड़ने की संभावना बन गई है। यह घटनाक्रम 9 अक्टूबर 2026 को सामने आया है, जहां जिले के विभिन्न क्षेत्रों में तैनात लेखपालों ने अपनी एकजुटता दिखाने के लिए यह कदम उठाया है। लेखपाल प्रशासन के साथ लगातार संवाद करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन समाधान न मिलने पर उन्होंने संचार के इस माध्यम का त्याग करना ही उचित समझा है।
प्रशासनिक कार्यों पर पड़ता हुआ असर
सरकारी व्हाट्सएप ग्रुप छोड़ने के बाद बिजनौर में विभागीय कार्यों की गति प्रभावित होने की खबरें मिल रही हैं। लेखपालों का तर्क है कि जब तक उनकी बुनियादी मांगें पूरी नहीं की जातीं, तब तक वे डिजिटल माध्यमों से प्रशासन के साथ तालमेल बिठाने में असमर्थ हैं। इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में लेखपालों ने अपने मोबाइल फोन से आधिकारिक समूहों से खुद को हटा लिया है। इस प्रदर्शन के कारण तहसील स्तर की सूचनाओं के आदान-प्रदान में बाधा उत्पन्न हो रही है, जो आमतौर पर व्हाट्सएप के जरिए त्वरित गति से की जाती थी। सरकारी कामकाज की समीक्षा करने वाले आला अधिकारियों को अब इन लेखपालों से संपर्क करने के लिए वैकल्पिक माध्यमों का सहारा लेना पड़ेगा। जिले के राजस्व विभाग के कर्मचारी अपनी कार्यप्रणाली और वेतन संबंधी विसंगतियों को लेकर लंबे समय से मुखर रहे हैं। उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक प्रशासन ठोस आश्वासन नहीं देता, तब तक वे किसी भी तरह के डिजिटल संचार के दबाव में काम करने के लिए तैयार नहीं हैं।
विरोध का संदर्भ और सरकारी कार्यप्रणाली
लेखपाल प्रशासन के महत्वपूर्ण स्तंभ होते हैं, जो राजस्व रिकॉर्ड तैयार करने से लेकर जमीन की पैमाइश तक का काम करते हैं। जब भी ये सरकारी कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर मुखर होते हैं, तो इसका सीधा असर आम जनता तक पहुंचने वाली सरकारी सेवाओं पर पड़ता है। व्हाट्सएप और अन्य डिजिटल माध्यमों के आने के बाद सरकारी विभागों में काम करना काफी तेज हो गया था, लेकिन अब इस संचार कड़ी के टूट जाने से कार्यक्षमता पर सवाल उठने लगे हैं। आमतौर पर इस प्रकार के विरोध प्रदर्शनों के पीछे वेतन वृद्धि, पदोन्नति की समस्या या सेवा शर्तों में सुधार जैसी मांगें प्रमुख होती हैं। बिजनौर में घटित यह घटना प्रशासनिक अधिकारियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है, क्योंकि उन्हें अब जमीनी स्तर पर सूचनाओं का आदान-प्रदान करने के लिए नई व्यवस्था बनानी होगी। इस मामले का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि स्थानीय प्रशासन इन लेखपालों के साथ बातचीत की मेज पर कब लौटता है और उनकी मांगों के समाधान के लिए क्या नया प्रस्ताव पेश करता है।