पुणे से लौटे युवक के साथ हुआ हादसा
लखनऊ जिले के रहीमाबाद थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इलाके में गुरुवार की शाम को एक गंभीर दुर्घटना घटित हुई। तरौना गांव निवासी विष्णु मौर्य की एक भैंस शाम के वक्त करीब 5 बजे गांव के पास स्थित बेहता नाले में बह गई थी। इस पशु को सुरक्षित बाहर निकलवाने के उद्देश्य से विष्णु के परिचित रोहित ने अपने दोस्त सूरज को मौके पर बुलाया था। सूरज कुछ ही दिन पहले पुणे से अपने घर वापस लौटा था और उसने इस बार अपने परिवार के साथ दीवाली का त्योहार यहीं मनाने की योजना बनाई थी। मदद की पुकार सुनकर सूरज अपने अन्य साथियों पिंटू, नीरज और दिल्कू के साथ तुरंत उस स्थान पर पहुंच गया जहाँ भैंस बही थी। प्रत्यक्षदर्शियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार सूरज अपनी कमर में एक जूट की मजबूत रस्सी बांधकर नाले के पानी में उतर गया था। नाले के भीतर उतरने के बाद अचानक से उसके हाथ से वह रस्सी छूट गई और वह पानी के तेज बहाव तथा भंवर की चपेट में आ गया। उसके साथ मौजूद साथियों ने उसे बचाने के लिए तुरंत अपनी तरफ से पूरे प्रयास किए, लेकिन वे लोग उसे सुरक्षित बाहर निकालने में पूरी तरह से असफल रहे।
प्रशासनिक टीम और गोताखोरों का रेस्क्यू
दुर्घटना की भयावह स्थिति तब और स्पष्ट हो गई जब सूरज वहां मौजूद तमाम लोगों की आंखों के सामने ही गहरे पानी के भीतर समा गया। इस भयंकर घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत हरकत में आ गई और प्रशासनिक अमला घटनास्थल पर पहुंच गया। एसीपी मलिहाबाद ज्ञानेंद्र सिंह ने मीडिया को इस संबंध में पूरी जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस दल ने स्थानीय गोताखोरों की सहायता से तुरंत बचाव अभियान शुरू किया। तरौना गांव के रहने वाले श्याम सुंदर सहित कई अन्य ग्रामीण भी सूरज की तलाश करने के लिए गोताखोरों के साथ पानी के अंदर उतरे। हालांकि राहत दल और ग्रामीणों के सामने खोजबीन करने में एक बहुत बड़ी बाधा यह आई कि पूरे नाले में भारी मात्रा में जलकुंभी फैली हुई थी। जलकुंभी और अत्यधिक गहराई होने के कारण इस सर्च ऑपरेशन की गति और प्रभावशीलता काफी हद तक प्रभावित हुई। पुलिस प्रशासन और स्थानीय नागरिकों द्वारा रात के समय तक लगातार सघन तलाशी अभियान चलाया गया, लेकिन देर रात तक भी सूरज का कोई भी सुराग हाथ नहीं लग सका। इस आकस्मिक दुर्घटना के घटित होने के बाद से सूरज के पूरे परिवार और रिश्तेदारों में भारी मातम छाया हुआ है।
गंभीर बनता जा रहा है बेहता नाले का खतरा
स्थानीय ग्रामीणों का ऐसा कहना है कि यह बेहता नाला अब क्षेत्र के लोगों के लिए एक अभिशाप और काल साबित होता जा रहा है। पिछले मात्र 11 दिनों के भीतर ही इस नाले में डूबने की यह तीसरी बेहद दर्दनाक घटना सामने आ चुकी है। इससे पहले ठीक इसी नाले में 27 सितंबर को एक 35 वर्षीय युवक की डूबने से मौत हो गई थी। इसके तुरंत बाद ही 29 सितंबर को भी एक 60 वर्षीय बुजुर्ग किसान इसी नाले के पानी में डूबकर अपनी जान गंवा चुका है। लगातार हो रही इन मौतों के बावजूद स्थानीय प्रशासन की तरफ से सुरक्षा के कोई भी पुख्ता इंतजाम या चेतावनी बोर्ड नहीं लगाए गए हैं। सूरज के इस तरह अचानक गहरे पानी में समा जाने की खबर मिलने के बाद से उसके घर में कोहराम मचा हुआ है। उसकी मां दुलारी, छोटा भाई राज तथा बहनें सीता, गीता और मोना इस हादसे के बाद से पूरी तरह से बेसुध हो चुकी हैं। मां दुलारी का रो-रोकर यही कहना है कि सूरज उनके घर का इकलौता और मुख्य कमाऊ पुत्र था जो पुणे में काम करता था। पिछले चौबीस घंटों से चल रहे इस तलाशी अभियान के बीच पूरा परिवार सूरज के सुरक्षित मिलने की उम्मीद लगाए बैठा है लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिली है।