पूजा पंडाल में तमाशा दिखाने के दौरान हुआ खतरनाक हादसा
मुनक्कीपुरवा गांव के निवासी महेश और उनके बेटे नौमीलाल को सांप पकड़ने का काफी शौक था। नौमीलाल अपने लंबे बाल और दाढ़ी रखता था तथा बिल्कुल सपेरे के रूप में घूमता रहता था। वह अक्सर आसपास के लोगों के घरों से सांप पकड़ा करता था। रविवार की रात को वह गांव के पास स्थित एक पूजा पंडाल में पहुंच गया। अपने साथ वह एक जहरीले काले नाग को लेकर गया था जिसे उसने एक बाग से पकड़ा था। पंडाल में मौजूद लोगों के सामने वह उस खतरनाक नाग का खेल दिखाने लगा। खेल दिखाने के दौरान ही उसने उस सांप के विषैले दांतों को तोड़ने का प्रयास शुरू कर दिया। वहां खड़े लोगों को लगा कि उस सांप के दांत पहले ही तोड़े जा चुके होंगे। लेकिन तभी अचानक उस सांप पर से नौमीलाल की पकड़ थोड़ी ढीली पड़ गई। पकड़ ढीली होते ही वह नाग उसके हाथ से सरक कर नीचे छूट गया। इसके तुरंत बाद उस जहरीले सांप ने नौमीलाल के पैर में जोरदार ढंग से डस लिया। अपने बेटे को इस तरह खतरे में देखकर नौमीलाल ने तुरंत उस सांप को दोबारा काबू करने की कोशिश की।
अस्पताल ले जाने के दौरान रास्ते में हुई बेटे की मौत
सांप के डसने के बाद जब नौमीलाल ने उसे पकड़ने का प्रयास किया तो स्थिति और बिगड़ गई। यह सब देखकर उसके पिता महेश अपने बेटे की जान बचाने के लिए तुरंत दौड़ पड़े। उन्होंने भागते हुए उस नाग को अपने हाथों से पकड़ना चाहा। लेकिन उस जहरीले सांप ने पिता महेश के पैर में भी डस लिया और वहां से तेजी से निकल भागा। इस गंभीर स्थिति के बाद दोनों घायलों को तुरंत जिला चिकित्सालय पहुंचाया गया। अस्पताल में नौमीलाल की हालत लगातार काफी ज्यादा खराब होने लगी। वह बार-बार बिस्तर से उठकर बैठने लगा और अपना सिर पटकने लगा। डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे जिला चिकित्सालय में भर्ती किया था। वहां उसका इलाज करते हुए उसे एंटी स्नेक वेनम के कुल 20 वायल लगाए गए। लेकिन इतनी दवा के बाद भी उसकी सेहत में किसी भी प्रकार का सुधार नहीं आया। जहर पूरे शरीर में फैलने के कारण उसकी आंखों की रोशनी पूरी तरह जा चुकी थी। गला पूरी तरह रुंध जाने के कारण उसका बोलना भी बिल्कुल बंद हो गया था। हालत ज्यादा नाजुक होने पर उसे लखनऊ के ट्रामा सेंटर के लिए रेफर कर दिया गया। लेकिन अफसोस की बात है कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में उसने दम तोड़ दिया।
इलाज के दौरान पिता की भी मौत और घर में मिले सांप
जिस समय बेटे नौमीलाल को बचाने के लिए पिता महेश दौड़े थे, तब सांप ने उनके पैर में भी डस लिया था। इसके बाद से ही पिता महेश का भी जिला चिकित्सालय में लगातार इलाज चल रहा था। लेकिन जहर का असर इतना तेज था कि डॉक्टरों के प्रयासों के बावजूद उनकी भी इलाज के दौरान मौत हो गई। पिता और पुत्र दोनों की एक साथ मौत हो जाने से पूरे परिवार में मातम छा गया है। रोते-बिलखते परिजनों की हालत देखकर हर कोई स्तब्ध रह गया। इस घटना के सामने आने के बाद एक चौंकाने वाली बात और सामने आई है। बताया जा रहा है कि मृतक महेश के घर के अंदर रखी दो बोरियों के भीतर लगभग दो दर्जन सांप रखे हुए हैं। इतनी बड़ी संख्या में सांपों का घर के अंदर मिलना इस बात की ओर इशारा करता है कि उनका परिवार सांप पकड़ने के कार्य में कितना सक्रिय था। इस हृदयविदारक हादसे ने पूरे इलाके के लोगों को झकझोर कर रख दिया है। लोग अब इस तरह के प्रदर्शनों को लेकर सावधानी बरतने की बात कह रहे हैं। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने भी इस तरह के खतरनाक कारनामों से दूर रहने की अपील की है ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।