महाराष्ट्रभर में चल रहे गणेशोत्सव के पावन पर्व के दौरान उत्सव का छठा दिन अत्यंत महत्वपूर्ण और भावनात्मक रूप से भरा रहा, जब विभिन्न सार्वजनिक मंडलों और घरेलू स्तर पर स्थापित बप्पा की मूर्तियों के विसर्जन का सिलसिला तेजी से आगे बढ़ा। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस विशेष दिन तक राज्य के विभिन्न हिस्सों में कुल मिलाकर इक्कीस हजार एक सौ से अधिक गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन पूरी श्रद्धा और प्रशासनिक सुरक्षा व्यवस्था के बीच संपन्न किया जा चुका है। मुंबई, पुणे, ठाणे और नागपुर समेत तमाम प्रमुख शहरों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके और भक्तजन शांतिपूर्ण तरीके से अपने आराध्य को विदाई दे सकें। इस दौरान स्थानीय निकायों और पुलिस प्रशासन ने कृत्रिम तालाबों, चौपाटी और जल स्रोतों के पास विशेष प्रबंध किए थे, जिससे विसर्जन प्रक्रिया सुचारू रूप से चल सके और पर्यावरण संरक्षण के नियमों का भी उचित पालन सुनिश्चित किया जा सके।
इस धार्मिक उल्लास और उत्सव के माहौल के बीच राज्य की राजनीति में एक नया और गंभीर मोड़ आ गया है, जब प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी ने मौजूदा परिस्थितियों को लेकर सरकार के समक्ष एक कड़ा और संवेदनशील मुद्दा उठाया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और प्रवक्ताओं ने सार्वजनिक मंचों से राज्य सरकार पर यह दबाव बनाना शुरू कर दिया है कि एक तरफ जहां सरकार और जनता धूमधाम से गणेशोत्सव मना रही है, वहीं दूसरी तरफ महाराष्ट्र के कई जिलों के किसान सूखे की गंभीर मार झेल रहे हैं। राज्य के विभिन्न ग्रामीण इलाकों में मानसून की अनिश्चितता और बारिश की भारी कमी के कारण खरीफ की फसलें या तो सूख चुकी हैं या उनकी स्थिति बेहद दयनीय बनी हुई है, जिससे कृषक वर्ग के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट पैदा हो गया है। कांग्रेस ने मांग की है कि प्रशासनिक मशीनरी को तुरंत प्रभाव से केवल उत्सव आयोजनों तक सीमित न रखकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सुध लेनी चाहिए और संकटग्रस्त किसानों को वित्तीय सहायता एवं राहत पैकेज प्रदान करना चाहिए।
इस राजनीतिक बयानबाजी और विसर्जन के आंकड़ों के बाद आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में कृषि संकट और प्रशासनिक प्राथमिकताओं को लेकर बहस और अधिक तीव्र होने की पूरी संभावना जताई जा रही है। विपक्षी दल लगातार यह मांग कर रहे हैं कि सरकार को तत्काल प्रभाव से सूखा प्रभावित क्षेत्रों का विस्तृत सर्वेक्षण कराकर प्रभावित किसानों के बैंक खातों में सीधी आर्थिक सहायता भेजनी चाहिए ताकि वे इस विकट परिस्थिति से बाहर निकल सकें। दूसरी ओर, सत्ता पक्ष के नेताओं का यह तर्क है कि सांस्कृतिक और धार्मिक पर्वों के साथ-साथ राज्य सरकार कृषि विकास और किसानों के कल्याण के लिए भी पूरी तरह प्रतिबद्ध है और समय-समय पर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि, गणेशोत्सव के इस उल्लास के बीच उठी किसानों की मदद की इस गूंज ने सरकार के सामने एक तरफ उत्सव के सफल संचालन की जिम्मेदारी तो दूसरी तरफ ग्रामीण अंचल की नाराजगी को दूर करने की एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।