गोमती में बाढ़ और हवाई सर्वेक्षण
पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, सीतापुर और नेपाल क्षेत्र में भारी बारिश होने के बाद गोमती नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया है। नदी का यह पानी पांच या छह दिन बाद निचले इलाकों में पहुंचा जिससे गंभीर जलभराव की स्थिति बन गई। इस प्राकृतिक आपदा के कारण बख्शी का तालाब, लखनऊ उत्तर और फैजुल्लागंज से नैमिष तक का पूरा क्षेत्र पानी की चपेट में आ गया है। इस गंभीर संकट का जायजा लेने के लिए मुख्यमंत्री ने फैजुल्लागंज से नैमिष तक के इलाके का हवाई सर्वेक्षण किया। इसके बाद उन्होंने सुल्तानपुर और बख्शी का तालाब के बाढ़ पीड़ितों के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनीं। मुख्यमंत्री ने मौके पर मौजूद लोगों को ढांढस बंधाया और सरकार की तरफ से हरसंभव मदद दिलाने का भरोसा दिया। उन्होंने इस दौरान बचाव कार्य में जुटे राज्य आपदा मोचन बल के जवानों और स्थानीय नागरिकों से भी बातचीत की और राहत कार्यों का पूरा जायजा लिया।
राहत सामग्री और स्वास्थ्य शिविर
प्रशासन की तरफ से बाढ़ प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और उन्हें जरूरी सहायता देने का काम तेजी से चल रहा है। प्रभावित गांवों और बस्तियों में हर परिवार को राशन किट दी जा रही है जिसमें दस किलो चावल, दस किलो आटा, दस किलो आलू, दो किलो अरहर दाल और तेल शामिल है। इसके अलावा खाने के सामान के साथ नमक, मिर्च, मसाले, बरसाती, बाल्टी, मोमबत्ती और माचिस जैसी जरूरत की चीजें भी बांटी जा रही हैं। प्रशासन यह भी सुनिश्चित कर रहा है कि राहत शिविरों में रहने वाले लोगों को दोनों समय का ताजा गर्म भोजन और बच्चों के लिए दूध मिले। गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए उनके लिए विशेष पौष्टिक आहार का प्रबंध किया गया है। जलभराव के कारण उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने के लिए जगह-जगह चिकित्सा शिविर लगाए गए हैं। इन शिविरों में सांप या अन्य जहरीले कीड़े के काटने के खतरे से निपटने के लिए एंटी स्नेक वेनम और अन्य जरूरी दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराई गई हैं।
स्थायी समाधान और तटबंध निर्माण
अक्टूबर महीने में गोमती नदी में इस तरह की बाढ़ का सामना कई वर्षों बाद करना पड़ा है जिस कारण सरकार अब केवल तात्कालिक उपायों तक सीमित नहीं रहना चाहती। भविष्य में इस तरह की आपदा को रोकने के लिए फैजुल्लागंज से नैमिष तक पूरे नदी तट का विस्तृत सर्वे कराया जाएगा। सिंचाई विभाग को इस पूरे क्षेत्र में नया तटबंध बनाने और उसकी समुचित व्यवस्था करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। तटबंध बनने के बाद बारिश का पानी आबादी वाले इलाकों में नहीं घुस पाएगा और जलभराव से बीमारियां नहीं फैलेंगी। इसके अलावा तटबंध के बाहर जमा होने वाले बारिश के अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने के लिए विशेष रूप से पंपिंग सेट लगाए जाएंगे। इस पूरी कार्ययोजना का प्रस्ताव तैयार कर जल्द ही स्वीकृति लेकर निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा ताकि हर साल आने वाली इस समस्या से लोगों को स्थायी सुरक्षा मिल सके। तटबंध को केवल सुरक्षा दीवार के रूप में ही नहीं बल्कि उस पर आवागमन की व्यवस्था के लिए भी विकसित किया जाएगा ताकि यह सड़क की तरह लोगों के आने-जाने में भी उपयोगी साबित हो सके।