रामलीला मेले में हाथी का हिंसक व्यवहार
बनारस के रामनगर इलाके में 18 अक्टूबर को रामलीला मेले का आयोजन हो रहा था, जहां करीब पांच टन वजनी एक नर हाथी अचानक अनियंत्रित हो गया। इस विशालकाय जानवर ने अपना आपा खोते हुए अपने ही महावत को पटककर गंभीर रूप से घायल कर दिया। स्थिति तब और भयावह हो गई जब हाथी ने सड़कों पर उतरकर तोड़फोड़ शुरू कर दी। उसने आसपास खड़े दो से तीन ऑटो-रिक्शा को क्षतिग्रस्त कर दिया और बिजली के खंभों को भी उखाड़ फेंका। हाथी का यह हिंसक रूप देखकर मेले में मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और वह वहां मौजूद लोगों को दौड़ाने लगा। करीब 14 से 15 घंटे तक चले इस तांडव ने पूरे क्षेत्र में दहशत फैला दी थी। स्थानीय लोग और मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शी इस घटना को हाथी का हथिनी से जुदाई का गम बता रहे हैं, जो वहां कुछ दिन रहने के बाद बिहार लौट गई थी।
बचाव अभियान और डॉक्टर की पड़ताल
हाथी को शांत करने के लिए बचाव कार्य में लगभग 50 से 60 लोगों की टीम जुटी थी, जिसमें वन विभाग के कर्मचारी और करीब 25 महावत शामिल थे। गोरखपुर से भी एक विशेषज्ञ टीम को मौके पर बुलाया गया था। शाम करीब छह बजे से शुरू हुए इस रेस्क्यू ऑपरेशन में पहले हुक और चेन का उपयोग करके हाथी को शारीरिक रूप से काबू करने का प्रयास किया गया, लेकिन रात के 12 बजे तक यह कोशिश नाकाम रही। अंततः डॉक्टर ने उसे ट्रेंक्विलाइज यानी बेहोशी की दवा देकर शांत करने का निर्णय लिया। नासिर खान की अगुवाई में चली इस कवायद के दौरान हाथी के व्यवहार की जांच की गई। सामने आया कि मेले में बिहार से आई एक मादा हथिनी प्रजनन के लिए अनुकूल अवस्था यानी हीट में थी, जिसके जाने के बाद से ही नर हाथी का व्यवहार बदलने लगा था और वह उत्तेजित हो गया था।
हार्मोनल बदलाव और सुरक्षा संबंधी सावधानियां
जानकारों के अनुसार, हाथियों में अक्टूबर से मार्च के दौरान टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्तर बढ़ सकता है, जिसे मस्ती की अवस्था कहा जाता है। इस शारीरिक परिवर्तन के कारण हाथी असामान्य रूप से आक्रामक हो सकते हैं और अपने पुराने परिचितों पर भी हमला कर सकते हैं। डॉक्टर ने बताया कि रामनगर की घटना में हाथी के शरीर में हार्मोनल बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, हालांकि इसे सीधे प्रेम या वियोग का नाम देना वैज्ञानिक रूप से कठिन है। हाथी को नियंत्रित करने के बाद उसकी निगरानी बेहद जरूरी होती है ताकि वह किसी चोट का शिकार न हो। यदि बेहोशी की दवा के असर में हाथी अपने पैरों के बीच बैठ जाए, तो उसे सांस लेने में दिक्कत हो सकती है, इसलिए उसे करवट पर लिटाना पड़ता है। कभी-कभी इतने भारी जीव को सही स्थिति में लाने के लिए जेसीबी जैसी मशीनों की मदद भी लेनी पड़ती है।