रोडवेज बसों में तकनीक का नया प्रयोग
उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम प्रशासन अपनी आगामी नई बसों के बेड़े में ईंधन चोरी रोकने के पुख्ता इंतजाम करने जा रहा है। इसके तहत सभी नई बसों के डीजल टैंक के भीतर विशेष रूप से सेंसरयुक्त डिवाइस स्थापित की जाएगी। परिवहन निगम ने यह निर्णय लिया है कि नई बसों की खरीद प्रक्रिया में इस तकनीक को अनिवार्य किया जाएगा। बस निर्माण और चेसिस आपूर्ति के लिए जारी होने वाली टेंडर शर्तों में ही इस उपकरण को शामिल किया जा रहा है। ऑटोमोबाइल कंपनियों को यह निर्देश दिया गया है कि वे परिवहन निगम को ऐसी बसें मुहैया कराएं जिनके टैंक में पहले से ही यह सुरक्षा सेंसर फिट हो। इस तकनीकी बदलाव का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सफर के दौरान या डिपो में खड़े होने पर वाहनों से ईंधन की अवैध निकासी को तुरंत पकड़ा जा सके।
कैसे काम करेगी यह निगरानी प्रणाली
इस नई तकनीकी व्यवस्था के लागू हो जाने से परिवहन विभाग के अधिकारियों को मोबाइल या अन्य माध्यमों से तुरंत सचेत किया जा सकेगा। यदि कोई व्यक्ति टैंक से ईंधन चोरी करने का प्रयास करता है या किसी कारणवश टैंक से रिसाव शुरू होता है, तो सेंसर तुरंत सक्रिय हो जाएगा। यह सेंसरयुक्त डिवाइस सीधे तौर पर संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों तक अलर्ट संदेश पहुंचा देगी जिससे त्वरित कार्रवाई करना संभव होगा। इसके अलावा डीजल टैंक में एक खास तरह का वॉल्व भी जोड़ा जाएगा जिसके कारण ईंधन भरवाने के बाद उसे दोबारा आसानी से बाहर निकालना संभव नहीं होगा। इस पूरी तकनीक के माध्यम से बसों द्वारा की जाने वाली ईंधन की कुल खपत पर भी बारीक नजर रखी जा सकेगी। रेलवे के इंजन संचालन में भी इसी तरह की प्रणाली का उपयोग किया जाता है जिससे वहां भी इस तरह की समस्याओं पर नियंत्रण पाने में काफी मदद मिलती है।
पुरानी घटनाओं के बाद उठाया गया कदम
परिवहन निगम प्रशासन द्वारा यह कड़ा कदम पूर्व में सामने आए ईंधन चोरी के कई मामलों के बाद उठाया गया है। पिछले साल अवध बस डिपो परिसर से 2,879 लीटर डीजल चोरी होने की बड़ी घटना सामने आई थी जिसने अधिकारियों को चिंता में डाल दिया था। इससे पहले खुर्जा डिपो के भीतर लगभग दो वर्षों तक लगातार डीजल चोरी होने के मामले पकड़े गए थे जिसके बाद छह चालकों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई थी। इसके अतिरिक्त 25 नवंबर 2021 को कैसरबाग डिपो की कुल सात बसों से 60 लीटर डीजल चोरी किए जाने का मामला भी प्रकाश में आया था। लगातार इस प्रकार की घटनाएं सामने आने के बाद विभाग ने ईंधन की खपत पर पारदर्शी निगरानी बढ़ाने का संकल्प लिया है। इस नई प्रणाली के आ जाने से न केवल ईंधन की चोरी पर प्रभावी अंकुश लगेगा बल्कि निगम के संसाधनों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सकेगी।