सहारनपुर में दवा व्यापार की निगरानी ठप
सहारनपुर जिले के भीतर दवा कारोबार की निगरानी प्रणाली इस समय पूरी तरह से ठप स्थिति में पहुंच चुकी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस क्षेत्र में न तो कोई नियमित औषधि निरीक्षक यानी ड्रग इंस्पेक्टर मौजूद है और न ही मेडिकल स्टोरों की किसी प्रकार की औचक जांच की जा रही है। इस व्यवस्था के पूरी तरह से चरमरा जाने के कारण स्थानीय स्तर पर दवा बाजारों में मनमानी बढ़ने की पूरी आशंका जताई जा रही है। किसी भी प्रकार के निरीक्षण के अभाव में कारोबारियों और दुकानदारों पर से प्रशासनिक नियंत्रण ढीला हो गया है। दवाइयों की बिक्री और उनके रख-रखाव जैसे महत्वपूर्ण मामलों में भी इस समय कोई देखने वाला नहीं बचा है। इस स्थिति के कारण आम जनता के स्वास्थ्य से जुड़े इस संवेदनशील व्यापार पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। प्रशासन की ओर से इस मामले में अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है जिससे स्थिति में सुधार हो सके। लोग इस बात को लेकर बेहद चिंतित हैं कि बिना किसी नियमित अधिकारी के जिले भर की दवा दुकानों का संचालन कैसे हो रहा है। दवा व्यापार से जुड़े इस बड़े संकट ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी कई तरह के प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं।
औषधि निरीक्षकों की कमी और जांच का अभाव
दवा कारोबार की निगरानी व्यवस्था के पूरी तरह से बंद हो जाने के पीछे मुख्य कारण अधिकारियों की भारी कमी बताया जा रहा है। सहारनपुर में नियमित औषधि निरीक्षक के न होने के कारण दुकानों की जांच का पूरा काम ठप पड़ गया है। नियमों के अनुसार हर मेडिकल स्टोर की समय-समय पर गहन जांच होनी चाहिए ताकि गुणवत्ता और लाइसेंस संबंधी मानकों की पूरी तरह से जांच की जा सके। परंतु वर्तमान स्थिति यह है कि शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक कहीं भी किसी दुकान का निरीक्षण नहीं किया जा रहा है। बिना किसी डर या जांच के दवा विक्रेता अपनी दुकानों का संचालन कर रहे हैं जिससे नियमों के उल्लंघन की संभावना बहुत अधिक बढ़ गई है। मरीजों को दी जाने वाली दवाइयों की शुद्धता और उनकी वैधता की जांच करने वाला इस समय जिले में कोई जिम्मेदार अधिकारी सक्रिय नहीं है। इस गंभीर प्रशासनिक लापरवाही के कारण बाजार में बिना लाइसेंस के या नियमों के विरुद्ध चलने वाली दुकानों पर भी कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है। जब तक विभाग की ओर से नए नियमित निरीक्षक की तैनाती नहीं की जाती तब तक यह स्थिति ऐसे ही बनी रहने की आशंका है। आम नागरिकों का कहना है कि स्वास्थ्य से जुड़े इस अहम विभाग में इस तरह की उदासीनता किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए।
कारोबार पर असर और सुधारात्मक कदमों की जरूरत
दवा व्यापार की निगरानी प्रणाली के ठप होने का सीधा असर अब स्थानीय बाजार और आम जनता की सुरक्षा पर पड़ने लगा है। किसी भी स्वास्थ्य प्रणाली में औषधि निरीक्षकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है क्योंकि वे ही यह सुनिश्चित करते हैं कि बाजार में बिकने वाली दवाइयां पूरी तरह सुरक्षित और मानक के अनुरूप हों। सहारनपुर जिले में इस व्यवस्था के पूरी तरह से पटरी से उतर जाने के कारण बाजार में किसी भी प्रकार का डर या अनुशासन शेष नहीं बचा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही इस दिशा में कोई कड़ा कदम नहीं उठाया गया तो स्थिति और अधिक बिगड़ सकती है। इस प्रकार की प्रशासनिक चूक से न केवल व्यापारिक पारदर्शिता प्रभावित होती है बल्कि उपभोक्ताओं के जीवन के साथ भी सीधा खिलवाड़ होता है। सरकार और संबंधित उच्च अधिकारियों को चाहिए कि वे तुरंत प्रभाव से इस जिले में एक नियमित औषधि निरीक्षक की नियुक्ति करें। इसके साथ ही सभी मेडिकल स्टोरों की नियमित जांच का सिलसिला भी दोबारा शुरू किया जाना चाहिए ताकि बाजार में नियमों का पालन सख्ती से हो सके। जब तक यह आवश्यक कदम नहीं उठाया जाता तब तक इस क्षेत्र के दवा कारोबार पर अनिश्चितता के बादल मंडराते रहेंगे और लोग बिना किसी डर के अपने नियमों के विरुद्ध काम जारी रख सकते हैं।