वाराणसी में रोपवे परियोजना का वर्तमान कार्य
वाराणसी जिले के भीतर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। उत्तर प्रदेश राज्य के इस प्राचीन शहर में सड़क मार्ग के समानांतर अब आसमान के रास्ते सफर करने की सुविधा मिलने जा रही है। कैंट से लेकर गोदौलिया के बीच निर्मित किए जा रहे इस बहुप्रतीक्षित रोपवे का कार्य अब अपने अंतिम पड़ाव पर आ गया है। मिली हुई आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस संपूर्ण परियोजना का लगभग 95 प्रतिशत कार्य पूरी तरह से संपन्न हो चुका है। संबंधित निर्माण एजेंसियों ने इस पूरे प्रोजेक्ट को आगामी 15 नवंबर तक पूरी तरह से मुकम्मल करने का सख्त लक्ष्य निर्धारित किया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के धरातल पर उतरने के बाद शहर के निवासियों के साथ साथ देश विदेश से आने वाले पर्यटकों को भी यातायात की एक अत्यंत तीव्र और आधुनिक सुविधा मिल सकेगी। सड़क मार्ग पर लगातार बढ़ते हुए गाड़ियों के दबाव को नियंत्रित करने के उद्देश्य से ही इस अनूठी परिवहन प्रणाली को तैयार किया जा रहा है ताकि आम जनता को शहर के मुख्य हिस्सों के बीच आने जाने में किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
दूरी समय और बुनियादी ढांचे का पूरा विवरण
वाराणसी में तैयार हो रही इस आधुनिक परिवहन प्रणाली की कुल लागत लगभग 817 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस पूरे और विस्तृत रोपवे कॉरिडोर की कुल लंबाई करीब 3.85 किलोमीटर तय की गई है। इस मार्ग पर कुल पांच प्रमुख स्टेशनों का निर्माण किया गया है जिनके नाम कैंट, काशी विद्यापीठ, रथयात्रा, गिरजाघर और गोदौलिया हैं। इन सभी स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है ताकि यात्रियों को किसी भी तरह की परेशानी न हो। इस संपूर्ण कॉरिडोर के दायरे में कुल 29 मजबूत टावरों को खड़ा किया गया है जिनके सहारे केबिन हवा में आवागमन करेंगे। इस पूरी परिवहन व्यवस्था में कुल 148 गोंडोला केबिन लगाए जाने की योजना है। प्रत्येक व्यक्तिगत केबिन के भीतर अधिकतम 10 यात्री एक साथ बैठकर आसानी से सफर का आनंद उठा सकेंगे। प्रस्तावित तकनीकी क्षमताओं के अनुसार इस रोपवे की कुल वहन क्षमता लगभग 2,000 यात्रियों प्रति घंटे की होगी। इस हाईटेक प्रणाली के शुरू हो जाने के बाद कैंट से गोदौलिया तक की इस दूरी को तय करने में केवल 15 से 16 मिनट का समय लगेगा। सामान्य तौर पर इसी निश्चित दूरी को सड़क मार्ग के माध्यम से पूरा करने में लोगों को 30 से 45 मिनट तक का लंबा समय लग जाता है जिससे यात्रियों का बहुमूल्य समय बर्बाद होता है।
किराया टिकट व्यवस्था और सांस्कृतिक पहचान की झलक
वाराणसी के आसमान में दौड़ने वाले इस नए परिवहन साधन में सफर करने का अनुभव बेहद रोमांचक और अनोखा रहने वाला है। गोंडोला केबिन के अंदर बैठकर सभी श्रद्धालु और पर्यटक नीचे की तरफ बहती हुई पवित्र गंगा की धारा, ऐतिहासिक घाटों की लंबी कतार, प्राचीन मंदिरों के ऊंचे शिखर और काशी की अनूठी सांस्कृतिक पहचान को हवा से निहार सकेंगे। इस यात्रा को यात्रियों के लिए और अधिक आकर्षक बनाने के उद्देश्य से मार्ग में आने वाली इमारतों की छतों और बाहरी दीवारों पर स्थानीय कला और संस्कृति को उकेरा जा रहा है। इसके तहत गंगा नदी, प्राचीन घाटों, पारंपरिक नावों, जलीय जीवों और स्थानीय जैव विविधता से जुड़ी सुंदर कलाकृतियों को तैयार करने की योजना पर कार्य चल रहा है। यात्रियों की सुविधा के लिए टिकटिंग प्रक्रिया को भी पूरी तरह से डिजिटल और आधुनिक बनाया जा रहा है। नमो घाट सहित शहर के कई अन्य प्रमुख स्थानों पर स्वचालित टिकट वेंडिंग मशीनें स्थापित करने की पूरी तैयारी कर ली गई है। इस रोपवे के लिए अलग अलग यात्रा दूरी के आधार पर 10 रुपये से लेकर 50 रुपये तक का किराया प्रस्तावित किया गया है। इसके अलावा स्मार्ट पास का उपयोग करने वाले नियमित यात्रियों को किराए में 20 प्रतिशत तक की विशेष छूट मिलने का प्रावधान भी प्रस्तावित किया गया है जिससे आम जनता को आर्थिक रूप से भी राहत मिल सकेगी।