मेस में एक्सपायर्ड पनीर मिलने पर बवाल
लखनऊ विश्वविद्यालय के न्यू कैंपस में रविवार रात उस समय भारी तनाव फैल गया जब कौटिल्य छात्रावास की मेस में छात्रों को परोसे जाने वाले पनीर के पैकेट की एक्सपायरी डेट निकल चुकी थी। खाना परोसने के दौरान ही छात्रों की नजर पनीर के पैकेट पर पड़ी, जिस पर 3 अक्टूबर की तिथि अंकित थी। एक्सपायरी डेट के बाद भी उसी सड़े हुए पनीर से सब्जी तैयार करने की बात सामने आने पर छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। दर्जनों छात्र हॉस्टल के मुख्य प्रवेश द्वार पर एकत्र हुए और मेस प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शनकारी छात्रों ने एक्सपायरी पनीर का पैकेट भी मीडिया और वहां मौजूद लोगों के सामने प्रस्तुत किया ताकि सच्चाई सामने आ सके। छात्रों का स्पष्ट आरोप है कि मेस संचालक उनकी सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं और घटिया सामग्री का इस्तेमाल करना उनकी आदत बन गई है। इस घटना ने विश्वविद्यालय परिसर में मेस संचालन की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
छात्रों ने की कठोर कार्रवाई की मांग
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि वे मेस के लिए निर्धारित शुल्क का भुगतान समय पर करते हैं, लेकिन उन्हें मिलने वाली सुविधा अत्यंत खराब स्तर की है। खाने की गुणवत्ता में लगातार गिरावट आने से छात्रों का स्वास्थ्य खतरे में है, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि मेस में उपयोग की जाने वाली हर प्रकार की खाद्य सामग्री की तुरंत गहन जांच कराई जाए। साथ ही, लापरवाही बरतने वाले मेस संचालक के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। छात्रों का कहना है कि खाने की क्वालिटी की दैनिक आधार पर निगरानी होनी चाहिए ताकि किसी भी छात्र को बीमार न होना पड़े। इस रात हुए प्रदर्शन ने हॉस्टल प्रशासन को बैकफुट पर ला दिया है, क्योंकि आक्रोशित छात्रों ने मेस की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी गहरी असहमति दर्ज कराई है।
लगातार शिकायतों से घिरा मेस प्रबंधन
न्यू कैंपस के हॉस्टल में खाने को लेकर हो रहा विरोध कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह इस सप्ताह का दूसरा बड़ा मामला है। इससे पहले शुक्रवार को ही कैलाश हॉस्टल की छात्राओं ने मेस के भोजन में कीड़े और बिच्छू निकलने का गंभीर आरोप लगाकर प्रदर्शन किया था। लगातार दो घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि मेस प्रबंधन की ओर से साफ-सफाई और भोजन की गुणवत्ता के मानकों की घोर अनदेखी की जा रही है। एक के बाद एक सामने आ रही इन शिकायतों ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। कौटिल्य हॉस्टल के छात्रों का मानना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए, तो स्थिति और बिगड़ सकती है। छात्रों का कहना है कि यह केवल एक पनीर का मामला नहीं है, बल्कि मेस की पूरी व्यवस्था की विफलता है। अब देखना यह है कि प्रशासन भविष्य में छात्रों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए मेस व्यवस्था में किस तरह के सुधार लागू करता है।