रामसनेही घाट तहसील के सामने जोरदार प्रदर्शन
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के रामसनेही घाट तहसील कार्यालय के सामने आज लेखपाल संघ ने बड़ा धरना दिया। इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में राजस्व कर्मी शामिल हुए और सरकार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। प्रदर्शन के दौरान सभी कर्मचारियों ने एकजुट होकर अपनी लंबित समस्याओं को उजागर किया। धरने के बाद संघ के सदस्यों ने उपजिलाधिकारी को एक विस्तृत मांग पत्र भी सौंपा। इस मांग पत्र में उनकी कई ऐसी समस्याएं शामिल हैं जो पिछले कई वर्षों से लगातार लंबित चली आ रही हैं और जिन पर अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इस दौरान चंद्रभान तिवारी, पंकज तिवारी, धनंजय पांडेय और अजय दीप सिंह समेत कई प्रमुख लेखपाल मौके पर मौजूद रहे और विरोध प्रदर्शन की पूरी कमान संभाली। सभी ने अपनी मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी की और प्रशासनिक अधिकारियों को अपनी समस्याओं से विस्तार से अवगत कराया। धरने की वजह से तहसील परिसर में काफी हलचल बनी रही और दूर-दूर से आए लोग इस विरोध प्रदर्शन को देखते रहे।
ग्रेड पे और ट्रांसफर समेत कई प्रमुख मांगें
लेखपाल संघ की ओर से उपजिलाधिकारी को सौंपे गए मांग पत्र में कई गंभीर और महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए हैं। कर्मचारियों ने मुख्य रूप से अपना ग्रेड पे 2800 रुपये करने की जोरदार मांग रखी है। इसके साथ ही लंबे समय से अटकी पड़ी अंतर्मंडलीय ट्रांसफर प्रक्रिया को तुरंत शुरू करने की बात कही गई है। पिछले कई सालों से रुकी हुई पदोन्नति प्रक्रिया को पूरी तरह से आगे बढ़ाने और उसे जल्द से जल्द पूरा करने की मांग भी रखी गई है। लेखपालों का यह भी कहना है कि पिछले 16 सालों से उनके किसी भी भत्ते में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है जो कि उनके साथ बड़ा अन्याय है। विभिन्न पटलों से लेखपालों को न हटाए जाने की समस्या का मुद्दा भी इस धरने के दौरान प्रमुखता से उठाया गया। कर्मचारियों ने यह भी मांग की है कि लेखपाल पद को एक तकनीकी पद घोषित किया जाए क्योंकि यह मांग भी बहुत लंबे समय से लंबित पड़ी है। इन सभी बिंदुओं को लेकर कर्मचारियों में गहरा रोष दिखाई दे रहा है और वे चाहते हैं कि प्रशासन बिना किसी और देरी के इन मामलों पर तुरंत उचित निर्णय ले ताकि उनकी परेशानियां दूर हो सकें।
ग्राम सचिवालयों के रोस्टर और भविष्य की अपील
धरने के दौरान लेखपालों ने बिना किसी बुनियादी सुविधा के ग्राम सचिवालयों में अपनी ड्यूटी लगाए जाने पर गंभीर आपत्ति जताई। उनका कहना है कि सुविधाओं के अभाव में रोस्टर के अनुसार काम करने से उन्हें रोजमर्रा के कामकाज में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लंबे समय से उनकी इन समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है जिससे उनका आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। लेखपालों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उनकी अटकी हुई मांगों को लेकर अभी तक किसी भी प्रकार की जरूरी कार्रवाई नहीं की गई है। अंत में लेखपालों ने सरकार से यह पुरजोर अपील की है कि उनके ग्रेड पे, अंतर्मंडलीय ट्रांसफर, पदोन्नति और भत्तों में बढ़ोतरी से जुड़ी सभी लंबित मांगों पर जल्द से जल्द फैसला लिया जाए। यदि समय रहते इन सभी मामलों का समाधान नहीं किया गया तो कर्मचारी भविष्य में और बड़ा कदम उठाने के लिए बाध्य हो सकते हैं। इस पूरी प्रक्रिया से स्थानीय प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है और सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इन मांगों पर क्या और कब तक रुख अपनाती है।