कामगारों का उग्र प्रदर्शन और तालाबंदी
चाकुलिया क्षेत्र में कार्यरत मजदूरों ने अपने लंबित पारिश्रमिक के भुगतान के लिए कड़ा रुख अपना लिया है। परियोजना स्थल पर काम करने वाले इन श्रमिकों ने जब विरोध प्रदर्शन किया, तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई। इस दौरान कार्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार को बाहर से बंद कर दिया गया, जिससे अंदर मौजूद कर्मचारी कुछ समय के लिए वहीं फंसकर रह गए थे। हालांकि, बाद में गेट का ताला खोल दिया गया और स्थिति को सामान्य करने का प्रयास किया गया। प्रदर्शन की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस की टीमें फौरन घटनास्थल पर पहुंच गईं। इन मजदूरों का स्पष्ट कहना है कि जब तक उनके सात महीने के बकाया वेतन का पूर्ण भुगतान नहीं हो जाता, तब तक वे पार्क में किसी भी प्रकार का काम नहीं करेंगे। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर मामले को शांत कराया, लेकिन मजदूर अपने भुगतान की निश्चित तारीख पर ही काम दोबारा शुरू करने पर अड़े हुए हैं।
अधिकारियों से लिखित आश्वासन और शर्तें
प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद वन विभाग के डीएफओ सबा आलम अंसारी के विशेष निर्देशों पर प्रभारी वनपाल संतोषील घोष ने प्रदर्शनकारी मजदूरों को आधिकारिक रूप से संबोधित किया। उन्होंने विभाग की ओर से लिखित आश्वासन देते हुए कहा कि आगामी 26 अक्टूबर तक सभी मजदूरों का बकाया भुगतान हर हाल में पूरा कर दिया जाएगा। इस आश्वासन के बाद मजदूर प्रदर्शन स्थल से वापस लौटे, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे 25 और 26 अक्टूबर की तारीख पर पूरी तरह नजर बनाए हुए हैं। मजदूरों ने अपने व्यक्तिगत संघर्ष साझा करते हुए बताया कि सात महीने से पैसे न मिलने के कारण उनका जीवन यापन करना दूभर हो गया है। जया पातर नामक एक महिला कर्मी ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि उन्हें अपने बच्चों की स्कूल फीस भरने के लिए अपना मोबाइल फोन केवल 6 हजार रुपये में बेचना पड़ गया था। परिवार के पास त्योहार के सीजन में बच्चों के लिए नए कपड़े खरीदने तक के पैसे नहीं बचे हैं।
हाथी भगाने वाली टीम की भी बदहाली
परियोजना स्थल पर जारी कॉटेज निर्माण और अन्य संबंधित निर्माण कार्यों के साथ-साथ एक अन्य गंभीर समस्या भी सामने आई है। चाकुलिया क्षेत्र में ही जंगली हाथियों के हमलों से लोगों को बचाने के लिए गठित क्यूआरटी यानी क्विक रिस्पांस टीम के सदस्यों ने भी अपनी व्यथा सुनाई है। इन सुरक्षाकर्मियों का आरोप है कि उन्हें भी पिछले सात महीनों से कोई मानदेय या वेतन नहीं मिला है। टीम के सदस्यों का कहना है कि उनकी उपस्थिति यानी हाजिरी तो नियमित रूप से लग रही है, लेकिन भुगतान नहीं होने के कारण वे अब जंगल में जाकर हाथियों को भगाने का जोखिम नहीं उठा रहे हैं। वेतन न मिलने से निराश ये सभी कर्मी अब विभाग की ओर से दी गई 26 अक्टूबर की समय सीमा का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। यदि उस तिथि तक बकाया राशि जारी नहीं होती है, तो इन कर्मियों द्वारा काम पर वापसी के आसार बेहद कम हैं। क्षेत्र में हाथियों का खतरा लगातार बना हुआ है, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण सुरक्षा टीम के काम पर न जाने से स्थानीय लोगों की चिंताएं और अधिक बढ़ गई हैं।