मौर्य एक्सप्रेस में पानी की भारी किल्लत
गोरखपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर दो से रविवार की सुबह लगभग 07:15 बजे मौर्य एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय पर रवाना हुई थी। यात्री अपनी आवंटित सीटों और बर्थ पर सवार हो गए, लेकिन यात्रा शुरू होते ही उन्हें भीषण समस्याओं का सामना करना पड़ा। जब कुछ यात्रियों ने हाथ-मुंह धोने के लिए वॉश बेसिन का रुख किया, तो वहां पानी की एक बूंद भी उपलब्ध नहीं थी। इसके बाद यात्रियों ने दूसरे और तीसरे बेसिन की भी जांच की, लेकिन हर जगह स्थिति समान थी। टॉयलेट के अंदर भी पानी की भारी किल्लत पाई गई, जिससे यात्रियों में हड़कंप मच गया। ट्रेन जैसे-जैसे गौरी बाजार, देवरिया और भटनी से आगे बढ़ती गई, पानी की समस्या और गंभीर होती गई। परेशान यात्रियों ने कोच के अंदर विरोध जताना शुरू कर दिया क्योंकि शौचालय और बेसिन पूरी तरह सूखे पड़े थे। इस स्थिति ने यात्रियों के लिए यात्रा को बेहद कष्टदायक बना दिया है, जबकि ट्रेन अभी भी अपने गंतव्य की ओर बढ़ रही है और यात्री बदहाली में सफर करने को मजबूर हैं।
यात्रियों का विरोध और बेडरोल की समस्या
ट्रेन में पानी न होने की जानकारी बर्थ नंबर 57 और 62 पर यात्रा कर रहे अविनाश कुमार और रीतम समेत अन्य यात्रियों ने तुरंत टीटीई रोशन कुमार को दी। यात्रियों के बढ़ते गुस्से और परेशानी को देखते हुए टीटीई ने सुबह लगभग 07:30 बजे कंट्रोल रूम में इस मामले की आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक ट्रेन के कोच में पानी की व्यवस्था सुचारू नहीं हो पाई थी। पानी की कमी के अलावा यात्रियों ने गंदे बेडरोल मिलने की भी तीखी शिकायत की है। यात्रियों का कहना है कि जब उन्होंने बेडरोल के पैकेट खोले, तो उनमें बाल लगे हुए थे और लिनेन पर जगह-जगह दाग के निशान मौजूद थे। जब कोच अटेंडेंट को बुलाकर यह स्थिति दिखाई गई, तो उसने दूसरा पैकेट दिया, जो कि पहले वाले की ही तरह गंदा था। अंततः तीन पैकेट बदलने के बाद चौथे प्रयास में यात्रियों को साफ-सुथरा बेडरोल मिल सका। यह स्थिति रेलवे की सेवाओं पर बड़े सवाल खड़ा करती है।
रेलवे प्रशासन का पक्ष और स्वच्छता अभियान
पूर्वोत्तर रेलवे में इस समय स्वच्छता पखवाड़ा और स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने को लेकर सघन अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन मौर्य एक्सप्रेस की वर्तमान स्थिति दावों की पोल खोल रही है। मामले पर मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सुमित कुमार ने स्पष्ट किया है कि कोच में पानी की आपूर्ति को लेकर समस्या पाइपलाइन में खराबी के कारण आई है, जबकि टैंक में पर्याप्त पानी मौजूद है। अधिकारी के अनुसार, इस समस्या का समाधान छपरा पहुंचने के बाद किया जाएगा। यह घटना इसलिए भी गंभीर है क्योंकि रेलवे प्रशासन लगातार स्वच्छता और यात्री सुविधाओं के बेहतर होने का दावा करता रहता है। बेडरोल के पैकेटों में गंदगी और पाइपलाइन में तकनीकी खामियों ने यात्रियों के सफर को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। यात्री कंट्रोल रूम में शिकायत दर्ज कराने और टीटीई को सूचित करने के बावजूद समाधान का इंतजार कर रहे हैं। अब देखना यह है कि छपरा में ट्रेन पहुंचने पर क्या वास्तव में पाइपलाइन की मरम्मत हो पाती है और यात्रियों को पानी की सुविधा बहाल हो पाती है या नहीं।