हमीरपुर में रात के समय कचरा फेंकने की समस्या
हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर क्षेत्र में स्वच्छता व्यवस्था को लेकर एक गंभीर समस्या लगातार बनी हुई है। यहां स्थानीय लोग और अज्ञात असामाजिक तत्व रात के अंधेरे का पूरा फायदा उठाते हैं। वे दिन की रोशनी छिपने के बाद सड़कों और खुले स्थानों पर कचरा फेंक देते हैं। इस तरह की अवैध गतिविधियों से पूरे इलाके में गंदगी का साम्राज्य फैलता जा रहा है। स्थानीय प्रशासन और नगर निगम के अधिकारी इस प्रकार के मामलों को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा पा रहे हैं। रात के सन्नाटे में होने वाली इन हरकतों की वजह से सुबह होते ही मुख्य मार्गों और रिहायशी बस्तियों के पास कूड़े के ढेर नजर आने लगते हैं। शहर के निवासियों का कहना है कि बार-बार शिकायत किए जाने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार देखने को नहीं मिल रहा है। नगर निगम के कर्मचारियों द्वारा समय पर कचरा उठाने का दावा किया जाता है लेकिन यह समस्या रात के समय मुख्य रूप से सामने आती है। इस गैरकानूनी कृत्य को अंजाम देने वाले लोग कानून के डर से पूरी तरह बेपरवाह नजर आते हैं और प्रशासन मूकदर्शक बना बैठा है।
प्रशासनिक विफलता और अधिकारियों की लाचारी
नगर निगम हमीरपुर के अंतर्गत आने वाले विभिन्न वार्डों में कचरा प्रबंधन की व्यवस्था बदहाल स्थिति में पहुंच चुकी है। रात के अंधेरे में खुलेआम कूड़ा फेंकने वालों पर नकेल कसने में निगम प्रशासन पूरी तरह नाकामयाब रहा है। शहर के नागरिकों का आरोप है कि निगम के अधिकारी केवल कागजी दावे कर रहे हैं और जमीनी स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। रात की गश्त लगाने वाली टीमों या निगरानी तंत्र की कमी के कारण ऐसे लोगों के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं। कई स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की मांग की गई थी लेकिन उन पर भी अब तक कोई ठोस अमल नहीं किया गया है। अधिकारियों की इस सुस्ती के चलते शहर की स्वच्छता रैंकिंग और सुंदरता दोनों पर बुरा असर पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने कई बार निगम कार्यालय में जाकर अपनी इस समस्या को प्रमुखता से उठाया है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की तरफ से केवल आश्वासन के अलावा और कुछ भी ठोस कदम नहीं उठाया गया है। कचरे के इस प्रकार अनियंत्रित तरीके से फैलाव के कारण आसपास के दुकानदारों और आम राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्वच्छता अभियान पर असर और भविष्य की चिंताएं
हमीरपुर में रात के वक्त फैलने वाले इस कचरे का सीधा असर सरकार के स्वच्छता अभियानों पर पड़ रहा है। शहर को साफ-सुथरा रखने के लिए चलाए जा रहे तमाम दावे इस प्रकार की लापरवाहियों की वजह से खोखले साबित हो रहे हैं। इस समस्या के कारण आम जनता के स्वास्थ्य पर भी एक बड़ा संकट मंडराने लगा है क्योंकि खुले में पड़े कचरे से बदबू और बीमारियां फैलती हैं। आवारा पशु इन कूड़े के ढेरों पर मंडराते रहते हैं जिससे यातायात बाधित होने के साथ-साथ सड़क हादसों का खतरा भी काफी बढ़ जाता है। जानकारों का मानना है कि यदि नगर निगम ने जल्द ही सख्त जुर्माने और निगरानी का प्रावधान नहीं किया तो स्थिति और अधिक बिगड़ सकती है। स्थानीय निवासियों का यह भी कहना है कि जब तक प्रशासन खुद इस मामले में गंभीर होकर औचक निरीक्षण नहीं करेगा तब तक इस प्रवृत्ति पर रोक नहीं लग सकती। आने वाले दिनों में यदि सख्त कदम नहीं उठाए गए तो यह प्रशासनिक नाकामी शहर के लिए एक लाइलाज बीमारी का रूप ले सकती है। सभी लोग अब केवल इसी बात का इंतजार कर रहे हैं कि कब निगम प्रशासन नींद से जागेगा और इस गंभीर समस्या का कोई स्थाई समाधान खोजेगा।