83 स्कूलों में शैक्षणिक सुधार की नई पहल
कुनकुरी विकासखंड में प्रारंभिक शिक्षा के स्तर को उन्नत करने के लिए 'नींव बहुभाषी शिक्षा' कार्यक्रम को प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत कुल 83 विद्यालयों को शामिल किया गया है जहाँ शिक्षण प्रक्रिया को स्थानीय परिवेश के अनुकूल बनाया जाएगा। कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत के क्रम में सलियाटोली स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय में तीन दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गई। यह विशेष प्रशिक्षण सत्र 5 अक्टूबर से 7 अक्टूबर तक संचालित किया गया जिसमें 16 संकुल अकादमिक समन्वयकों ने सहभागिता निभाई। इस पहल का संचालन विकासखंड शिक्षा अधिकारी और विकासखंड केंद्र स्रोत समन्वयक के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। इसका प्राथमिक ध्येय यह सुनिश्चित करना है कि प्राथमिक कक्षाओं में बच्चे अपनी परिचित भाषा के माध्यम से धीरे-धीरे हिंदी की शब्दावली और व्याकरण को सरलता से आत्मसात कर सकें। इस रणनीति से बच्चों की सीखने की गति में तेजी आने की उम्मीद है।
अकादमिक समन्वयकों को दी जा रही गहन ट्रेनिंग
इस कार्यशाला में संकुल अकादमिक समन्वयकों को बहुभाषी शिक्षा की वैज्ञानिक अवधारणाओं के बारे में विस्तार से समझाया गया है। प्रशिक्षकों ने उन्हें विद्यालय स्तर पर शिक्षकों को निरंतर अकादमिक सहयोग प्रदान करने की विभिन्न रणनीतियों पर मार्गदर्शन दिया है। समन्वयकों को यह सिखाया जा रहा है कि वे कैसे शिक्षकों की दैनिक शैक्षणिक आवश्यकताओं को समझें और कक्षा के भीतर शिक्षण गतिविधियों को रोचक बनाएं। इसके अलावा, प्रशिक्षण कार्यक्रम में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि शिक्षकों के साथ तालमेल बिठाकर कक्षा शिक्षण को अधिक सहभागी कैसे बनाया जाए। भविष्य में ये समन्वयक अपने कार्यक्षेत्र के 83 स्कूलों में जाकर शिक्षकों को नियमित सहायता प्रदान करेंगे। इस दौरान वे विद्यालय भ्रमण के माध्यम से शिक्षण सामग्री के उपयोग की गहन निगरानी भी करेंगे। प्रशिक्षण के दौरान स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि बच्चों की भाषा और सीखने की क्षमता को केंद्र में रखकर ही शिक्षण विधियों का चयन और प्रयोग किया जाना चाहिए।
शिक्षण सामग्री और भविष्य की कार्ययोजना
नींव बहुभाषी शिक्षा कार्यक्रम के तहत पहले ही चरण में 20 से 25 अगस्त 2026 के बीच 83 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। अब समन्वयकों को उन्मुख करके इस ज्ञान को सीधे कक्षाओं तक ले जाने की ठोस तैयारी की जा रही है। कक्षाओं में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण के लिए सादरी व हिंदी के चित्र चार्ट, कहानी की पुस्तकें, कार्यपुस्तिकाएं, ग्रिड कार्ड और अक्षर कार्ड जैसी व्यापक सामग्री उपलब्ध कराई गई है। इसके अतिरिक्त, शिक्षक संदर्शिका और बिग बुक के माध्यम से पढ़ाई को सरल बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। कार्यक्रम में प्रति दिवस और प्रति सप्ताह के अनुसार चार ब्लॉक मॉडल के आधार पर गतिविधियों का संचालन करने हेतु निर्देश दिए गए हैं। इसका अंतिम लक्ष्य यह है कि स्थानीय बोली के आधार पर बच्चा हिंदी को अपनी मूल भाषा की तरह सहज रूप से ग्रहण करे। इस शैक्षणिक बदलाव के माध्यम से स्कूली वातावरण को बच्चों के लिए अधिक अनुकूल और सहभागी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।