फैजुल्लागंज में बाढ़ से बदहाल स्थिति
लखनऊ का फैजुल्लागंज इलाका पिछले 10 दिनों से भयंकर बाढ़ की चपेट में है और यहां का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है। हर तरफ केवल पानी ही पानी भरा हुआ है, जिसकी वजह से स्थानीय निवासियों के लिए घर से निकलना दुभर हो गया है। इस जलभराव ने न केवल घरों को नुकसान पहुंचाया है बल्कि दैनिक उपभोग की चीजों का भी भारी संकट खड़ा कर दिया है। यहां के लोग साफ पीने योग्य पानी के लिए भी तरस रहे हैं। कई बुजुर्ग निवासी इस स्थिति में बीमार हो गए हैं और उन्हें बुखार जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। सबसे दुखद पहलू यह है कि बाजार तक पहुंच न होने के कारण इन बीमार लोगों को दवाइयां तक उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। युवाओं को अपने परिजनों के लिए दवा लाने हेतु कमर तक गहरे पानी में कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ रहा है, जिससे उन्हें वापस लौटने में छह घंटे तक का समय लग रहा है। इस दौरान पूरा इलाका एक कठिन त्रासदी से गुजर रहा है और लोगों का धैर्य जवाब देता जा रहा है।
बीमारी और प्रशासनिक लापरवाही का दंश
बाढ़ के इन दस दिनों में बीमारी के कारण अब तक तीन लोगों की मृत्यु की पुष्टि हुई है, जो स्थानीय प्रशासन की निष्क्रियता को दर्शाती है। कैलाश बिहार में 2 अक्टूबर को मीना कन्नौजिया, 3 अक्टूबर को लोहरामऊ में डेढ़ साल की शिफा और 5 अक्टूबर को अन्नपूर्णानगर में 72 वर्षीय बंशीलाल ने बुखार के बाद दम तोड़ दिया। आकाश नामक एक युवक ने बताया कि वह अपनी बीमार मां के लिए दवा लाने निकला था, लेकिन नाव न मिलने के कारण उसे पांच घंटे तक घर से दूर पानी में फंसे रहना पड़ा। प्रभात देवी जैसी बुजुर्ग महिलाएं सुबह से छत पर बिना अन्न-जल के बैठने को मजबूर हैं और उन्हें कोई प्रशासनिक मदद नहीं मिल रही है। स्थानीय निवासी उत्कर्ष मिश्रा का कहना है कि प्रशासन का कोई भी अधिकारी जमीनी हकीकत देखने नहीं आ रहा है, जबकि इलाके में पानी का स्तर सीने तक पहुंच चुका है। लोगों का आरोप है कि चुनाव के समय वोट मांगने वाले नेता अब गायब हैं और जनता को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है।
विस्थापन का दर्द और भविष्य की चिंता
इस बाढ़ ने फैजुल्लागंज के लगभग 20 हजार परिवारों को घर छोड़कर पलायन करने के लिए मजबूर कर दिया है, जिससे क्षेत्र में सन्नाटा पसरा हुआ है। लगभग 40 हजार घरों की पहली मंजिल पर रखा कीमती सामान, जैसे टीवी, फ्रिज और अन्य घरेलू उपकरण पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं, जिससे लोगों को करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है। आदर्श जैसे दुकानदारों ने बताया कि पानी की वजह से उनका सारा सामान खराब हो गया और दुकान में रहने वाले किराएदार भी सब कुछ छोड़कर जा चुके हैं। पिछले 24 घंटों से बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण मोबाइल चार्ज करना भी मुश्किल हो गया है, जिससे संपर्क टूटने का डर बना हुआ है। इसके अलावा, घरों में चोरी की घटनाएं भी शुरू हो गई हैं जो लोगों की चिंता को और बढ़ा रही हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार 10 साल पहले बांध निर्माण की योजना स्वीकृत हुई थी, लेकिन लापरवाही के चलते वह अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी। अब जनता केवल यही सोच रही है कि इस विकट स्थिति में वे जीवित कैसे बचेंगे।