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पीएनजी ठगी का मामला: कमिश्नर आवास के कर्मचारी से 6.55 लाख की धोखाधड़ी

गोरखपुर में कमिश्नर आवास के पीएनजी कनेक्शन के नाम पर एक कर्मचारी के साथ साइबर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। अज्ञात जालसाज ने बकाया भुगतान का झांसा देकर पीड़ित से 6.55 लाख रुपये की राशि ऐंठ ली है।

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Ankit Yadav
18 अक्ट 2026, 15:44
पीएनजी ठगी का मामला: कमिश्नर आवास के कर्मचारी से 6.55 लाख की धोखाधड़ी

पीएनजी बकाया वसूली के नाम पर धोखाधड़ी

गोरखपुर में एक गंभीर साइबर अपराध का मामला प्रकाश में आया है जहां पीएनजी कनेक्शन का बकाया भुगतान कराने के बहाने एक कर्मचारी को शिकार बनाया गया है। पीड़ित रवि प्रकाश ने साइबर थाने में अपनी शिकायत दर्ज कराई है और बताया कि उनके साथ बड़ी वित्तीय धोखाधड़ी हुई है। कमिश्नर आवास के पीएनजी कनेक्शन में रवि प्रकाश का मोबाइल नंबर पंजीकृत था और इसी बात का लाभ उठाकर जालसाज ने उन्हें अपना निशाना बनाया है। अज्ञात व्यक्ति ने बकाया भुगतान को लेकर पीड़ित से संपर्क किया और उसे पूरी तरह से अपने जाल में फंसा लिया। इस पूरी घटना के दौरान पीड़ित को ऑनलाइन माध्यम से धमकाया गया और शारीरिक नुकसान पहुंचाने का डर दिखाकर रुपये ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया। यह घटना ऑनलाइन सुरक्षा और डिजिटल धोखाधड़ी के प्रति आम जनता की चिंता को बढ़ाने वाली है। पुलिस अब इस मामले की गहनता से जांच कर रही है ताकि अपराधी का पता लगाया जा सके।

जालसाज का तरीका और पुलिस की जांच

धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए जालसाज ने बेहद शातिर तरीके का इस्तेमाल किया है। उसने सबसे पहले कमिश्नर आवास से जुड़े उस पीएनजी कनेक्शन की जानकारी हासिल की जिसमें रवि प्रकाश का नंबर दर्ज था। इसके बाद पीड़ित को फोन कर डराया और धमकाया गया ताकि वह बिना किसी संदेह के रुपये ट्रांसफर कर दे। आरोपी ने शारीरिक नुकसान पहुंचाने का भय दिखाकर पीड़ित को मानसिक दबाव में डाल दिया था। रवि प्रकाश ने साइबर थाने में दी गई अपनी आधिकारिक शिकायत में उत्तर प्रदेश के क्षेत्राधिकार के भीतर हुई इस वित्तीय ठगी का स्पष्ट विवरण दिया है। पुलिस ने पीड़ित की शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। जांच अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि रुपये किस माध्यम से और किन बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए हैं। डिजिटल लेनदेन के डेटा का बारीकी से विश्लेषण किया जा रहा है ताकि जालसाज की पहचान की जा सके। पुलिस इस बात पर भी गौर कर रही है कि अपराधी तक पहुंचने के लिए किन तकनीकी सुरागों का उपयोग किया जाना चाहिए।

सुरक्षा के प्रति सतर्कता का महत्व

यह मामला आम लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि वे कभी भी किसी अज्ञात व्यक्ति के फोन पर डरकर या दबाव में आकर अपनी मेहनत की कमाई साझा न करें। डिजिटल युग में ठग लोगों को सरकारी कार्यालयों या बड़े आवासों के कनेक्शन के नाम पर डराने की कोशिश करते हैं। किसी भी बकाया भुगतान की जानकारी के लिए हमेशा आधिकारिक वेबसाइट या संबंधित विभाग के कार्यालय से ही संपर्क करना चाहिए। मोबाइल पर आने वाले संदेशों या कॉल के माध्यम से कभी भी सीधे भुगतान नहीं करना चाहिए क्योंकि जालसाज अक्सर डराने-धमकाने वाले हथकंडे अपनाते हैं। गोरखपुर साइबर थाना अब इस मामले के हर पहलू की पड़ताल कर रहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। ऑनलाइन लेनदेन करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतना ही एकमात्र बचाव है। पीड़ित ने जिस तरह से इस घटना की सूचना पुलिस को दी है, वह अन्य लोगों के लिए एक सीख है कि ठगी होने पर तुरंत कानूनी मदद लेनी चाहिए। पुलिस की जांच का असर यह होगा कि अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ने में मदद मिलेगी और भविष्य में ऐसी वारदातों पर अंकुश लग सकेगा।

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