सड़क पर जलजमाव और अतिक्रमण की समस्या
रांची और चतरा को जोड़ने वाली मुख्य सड़क इन दिनों भारी अव्यवस्था के दौर से गुजर रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि मुंडा समाज को बासगीत पर्चा के माध्यम से आवंटित भूमि और उसके सामने मौजूद रैयती जमीन पर मकान और दुकानों का अवैध निर्माण किया गया है। क्षेत्र में स्थिति तब और बिगड़ गई जब कोल इंडिया लिमिटेड यानी सीसीएल द्वारा पुलिया को हटा दिया गया। इस घटनाक्रम का लाभ उठाकर कुछ लोगों ने पाइपों के जरिए घरों का दूषित गंदा पानी सीधे मुख्य मार्ग पर डालना शुरू कर दिया है। इसका सीधा असर यह हुआ कि सड़क पर हर समय कीचड़ और पानी भरा रहता है, जिससे राहगीरों और वाहनों का गुजरना कठिन हो गया है। जलजमाव की इस निरंतर समस्या के कारण सड़क पर फिसलन पैदा होती है, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं होने का खतरा बना हुआ है। स्थानीय लोगों का जीवन इस अतिक्रमण और गंदगी के कारण बुरी तरह प्रभावित हो गया है।
सार्वजनिक सुविधाओं पर अवैध कब्जा और प्रशासन की चुप्पी
आम जनजीवन को और अधिक कष्टदायक बनाने का काम सार्वजनिक संपत्तियों पर किए गए अतिक्रमण ने किया है। निवासियों के अनुसार, जो स्थान जनता की सुविधा के लिए आरक्षित थे, उन पर भी कथित तौर पर कब्जा कर लिया गया है। सीसीएल के सीएसआर या विकास मद से आम लोगों की सहूलियत के लिए एक बस स्टैंड और सार्वजनिक कुएं का निर्माण किया गया था, लेकिन अब उन पर दूसरों का नियंत्रण हो गया है। इसके परिणामस्वरूप, क्षेत्र की जनता इन मूलभूत सुविधाओं का लाभ उठाने से पूरी तरह वंचित हो गई है। लोग कई बार इस मामले की शिकायत प्रशासन के समक्ष कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई देखने को नहीं मिली है। उनकी शिकायत है कि जब मार्ग पर जाम की स्थिति उत्पन्न होती है, तभी प्रशासन सक्रिय होता है। जैसे ही वाहनों की आवाजाही सामान्य होती है, अधिकारी फिर से उदासीन हो जाते हैं और पुरानी स्थिति बहाल हो जाती है।
निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई की मांग
वर्तमान स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बुद्धिजीवियों और स्थानीय नागरिकों ने राज्य प्रशासन से कड़े कदम उठाने की मांग की है। निवासियों की प्राथमिक मांग है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि अतिक्रमणकारियों की पहचान हो सके। लोगों ने प्रशासन को दिए गए ज्ञापन में कथित अवैध कब्जों को तुरंत हटाने और बिजली चोरी जैसे गंभीर आरोपों की जांच करने का आग्रह किया है। इसके अलावा, मुख्य मार्ग पर घरों का दूषित गंदा पानी बहाने वालों पर सख्त रोक लगाई जानी चाहिए। निवासियों का मानना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते इन समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं निकाला, तो जलजमाव और भारी अव्यवस्था के कारण किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता है। लोग अब एक सुरक्षित और साफ-सुथरा वातावरण चाहते हैं ताकि वे बिना किसी डर या असुविधा के सार्वजनिक सुविधाओं का उपयोग कर सकें और सुरक्षित तरीके से सड़क पार कर सकें।